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₹68,000 न्यूनतम बेसिक पे और 3.25 फिटमेंट फैक्टर की मांग: चेन्नई और चंडीगढ़ की बैठकों में कर्मचारी संगठनों ने 7वें वेतन आयोग के 2.57 फैक्टर के मुकाबले 3.25 फिटमेंट फैक्टर और ₹68,000 न्यूनतम मूल वेतन की पुरजोर पैरवी की।
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पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शीर्ष प्राथमिकता: देशभर के कर्मचारियों और पेंशनर्स फोरम ने OPS को दोबारा लागू करने और पेंशन व पारिवारिक पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की मांग दोहराई।
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2026 से पहले के पेंशनर्स पर कानूनी पेंच: जानकारों और कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी कि पेंशन अर्जित अधिकार है; 2026 से पहले रिटायर हुए OPS और NPS/UPS कर्मियों को नए फिटमेंट लाभ से वंचित रखना असंवैधानिक विवाद को जन्म दे सकता है।
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हिमाचल का विशेष पैकेज और पंजाब का चुनावी दांव: हिमाचल के कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के चलते मैदानी राज्यों से अधिक वेतन मांगा, वहीं पंजाब सरकार ने OPS की फीजिबिलिटी स्टडी के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय लिया।
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रिपोर्ट के लिए बचे सिर्फ 8 महीने, अगला पड़ाव बेंगलुरु: 18 महीने के कार्यकाल में से 10 महीने पूरे होने के बाद आयोग अब 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में मंथन करेगा; मई-जून 2027 तक अंतिम रिपोर्ट सौंपे जाने की संभावना है।
नई दिल्ली: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की सिफारिशों को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, राज्य कर्मियों और पेंशनभोगियों में सरगर्मी तेज हो गई है। चेन्नई से लेकर चंडीगढ़ तक हुई परामर्श बैठकों में कर्मचारी संगठनों ने वेतन संशोधन, फिटमेंट फैक्टर और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कड़े तेवर अपनाए हैं। चेन्नई में जहां न्यूनतम बेसिक पे ₹68,000 करने की मांग रखी गई, वहीं चंडीगढ़ में 3.25 फिटमेंट फैक्टर का गणित पेश किया गया। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर मैदानी इलाकों से अधिक वेतन की पैरवी की है, जबकि पंजाब सरकार ने OPS की फीजिबिलिटी स्टडी के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय लेकर नया राजनीतिक दांव चल दिया है।
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चेन्नई बैठक: ₹68,000 न्यूनतम वेतन और पेंशनर्स फोरम का 5 सूत्रीय एजेंडा
चेन्नई में आयोजित स्टेकहोल्डर्स परामर्श बैठक में चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम ने कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों के आर्थिक अधिकारों पर विस्तृत मांग पत्र सौंपा:
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न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹68,000: फोरम ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम मूल वेतन को सीधे ₹68,000 करने की वकालत की।
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वेतन संशोधन का स्थायी तंत्र: हर 10 साल में वेतन आयोग के गठन का इंतजार करने के बजाय महंगाई और आर्थिक सूचकांक के आधार पर वेतन संशोधन का एक स्थायी मैकेनिज्म (Permanent Pay Revision System) बनाने और रनिंग पे-स्केल्स लागू करने की मांग की गई।
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पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली: देशभर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने को शीर्ष प्राथमिकता बताया गया।
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पेंशन व पारिवारिक पेंशन में वृद्धि: सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेसिक पेंशन बढ़ाने की पैरवी की गई।
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कम्यूटेशन और MACP सुधार: पेंशन कम्यूटेशन की एकमुश्त राशि की रिकवरी के नियमों का सरलीकरण करने और मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेस (MACP) में सुधार कर डाक कर्मचारियों को बेहतर प्रमोशन लाभ देने की मांग उठी।
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चंडीगढ़ बैठक: 3.25 फिटमेंट फैक्टर और नर्सिंग स्टाफ की मांगें
चंडीगढ़ में संपन्न हुई तीन दिवसीय बैठक में नर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन (NWA) और पीजीआईएमईआर (PGIMER) के प्रतिनिधियों ने 7वें वेतन आयोग के 2.57 फिटमेंट फैक्टर के मुकाबले 3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई:
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लेवल-10 एंट्री पे की मांग: नर्सिंग अधिकारियों के लिए एंट्री-लेवल पे ‘लेवल-10’ (मूल वेतन ₹56,100) करने की मांग रखी गई। एसोसिएशन की दलील है कि शैक्षणिक योग्यता अब GNM से B.Sc नर्सिंग हो चुकी है और स्वास्थ्य मंत्रालय की सिफारिशों के अनुरूप उन्हें मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) के समान दर्जा मिलना चाहिए।
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3.25 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर संभावित पे-मैट्रिक्स (लेवल 1 से 18)
यदि केंद्र सरकार कर्मचारी संगठनों की मांग पर 3.25 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर करती है, तो बेसिक सैलरी में संभावित बढ़ोतरी इस प्रकार होगी:
| पे लेवल | वर्तमान बेसिक पे (₹) | 3.25 फिटमेंट फैक्टर के बाद (₹) | बेसिक पे में संभावित वृद्धि (₹) |
| लेवल 1 | ₹18,000 | ₹58,500 | ₹40,500 |
| लेवल 2 | ₹19,900 | ₹64,675 | ₹44,775 |
| लेवल 3 | ₹21,700 | ₹70,525 | ₹48,825 |
| लेवल 4 | ₹25,500 | ₹82,875 | ₹57,375 |
| लेवल 5 | ₹29,200 | ₹94,900 | ₹65,700 |
| लेवल 6 | ₹35,400 | ₹1,15,050 | ₹79,650 |
| लेवल 7 | ₹44,900 | ₹1,45,925 | ₹1,01,025 |
| लेवल 8 | ₹47,600 | ₹1,54,700 | ₹1,07,100 |
| लेवल 9 | ₹53,100 | ₹1,72,575 | ₹1,19,475 |
| लेवल 10 | ₹56,100 | ₹1,82,325 | ₹1,26,225 |
| लेवल 11 | ₹67,700 | ₹2,20,025 | ₹1,52,325 |
| लेवल 12 | ₹78,800 | ₹2,56,100 | ₹1,77,300 |
| लेवल 13 | ₹1,18,500 | ₹3,85,125 | ₹2,66,625 |
| लेवल 13A | ₹1,31,100 | ₹4,26,075 | ₹2,94,975 |
| लेवल 14 | ₹1,44,200 | ₹4,68,650 | ₹3,24,450 |
| लेवल 15 | ₹1,82,200 | ₹5,92,150 | ₹4,09,950 |
| लेवल 16 | ₹2,05,400 | ₹6,67,550 | ₹4,62,150 |
| लेवल 17 | ₹2,25,000 | ₹7,31,250 | ₹5,06,250 |
| लेवल 18 | ₹2,50,000 | ₹8,12,500 | ₹5,62,500 |
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हिमाचल की मांग: ‘समान वेतन, असमान परिस्थितियां’ का नियम बदले
चंडीगढ़ में 17-18 सितंबर को ‘ऑल इंडिया सर्विस एसोसिएशन हिमाचल’ के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग की अध्यक्ष जस्टिस रंजना देसाई के समक्ष पहाड़ी राज्य की भौगोलिक विषमताओं को आधार बनाते हुए विशेष वित्तीय लाभ की मांग की:
एसोसिएशन का तर्क है कि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, भूस्खलन और कठिन आवागमन के बीच सेवाएं देनी पड़ती हैं। ऐसे में दिल्ली जैसे मैदानी क्षेत्रों के बराबर वेतनमान देना न्यायसंगत नहीं है।
महंगी जीवन-यापन लागत को देखते हुए डीए (महंगाई भत्ता) और अन्य भत्तों में विशेष वेटेज देने की मांग की गई। इस बैठक में ग्रामीण विकास सचिव सी. पाल रासु, पीसीसीएफ संजीव सूद, विशेष वित्त सचिव विजय वर्धन, आईएएस रितिका जिंदल, दिव्यांशु सिंघल और आईपीएस अशोक रत्न शामिल रहे।
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पंजाब सरकार का नया दांव: OPS के अध्ययन के लिए मांगा 4 महीने का समय
पंजाब की भगवंत मान सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया है:सरकार ने प्रस्तावित पेंशन योजना के वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं, केंद्र की यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और अन्य राज्यों के पेंशन मॉडल्स के अध्ययन के लिए 4 महीने का अतिरिक्त समय लिया है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने इसे चुनावी मजबूरी करार दिया। उन्होंने कहा कि 2022 के नोटिफिकेशन के बावजूद अब तक इसे जमीन पर नहीं उतारा गया। फेडरेशन ने गैर-बीजेपी शासित राज्यों (पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल) द्वारा OPS लागू करने पर केंद्र पर दबाव बढ़ने की बात कही और आगामी 20 दिसंबर को दिल्ली में देशव्यापी विशाल आंदोलन का ऐलान किया।
छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए केंद्र के साथ ही राज्य में इसे बिना देरी के लागू करने, बकाया एरियर के भुगतान और 3.0 से 3.25 तक का फिटमेंट फैक्टर तय करने की प्रमुख मांग रखी है। इसके अलावा कर्मचारी संगठनों का जोर केंद्र के समान समय पर महंगाई भत्ता (DA) जारी करने, डीए 50% होने पर उसे मूल वेतन में मर्ज करने, रायपुर, भिलाई व बिलासपुर सहित ब्लॉक स्तर पर मौजूदा बाजार दरों के आधार पर गृह भाड़ा भत्ता (HRA) का पुनरीक्षण करने, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की गारंटी को पूरी तरह सुरक्षित रखने और संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के मानदेय ढांचे में आनुपातिक सुधार सुनिश्चित करने पर है।
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2026 से पहले के पेंशनर्स पर कानूनी पेंच
बैठक के बाद वर्ष 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों के अधिकारों पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं: विधि विशेषज्ञों का कहना है कि पेंशन कोई उपहार नहीं, बल्कि पूर्व सेवा के बदले मिला अर्जित अधिकार है। 2026 से पहले के पेंशनर्स के लाभों को रोकना कानूनी रूप से चुनौती के योग्य होगा।सेना के उलट सिविल सेवाओं में अनगिनत कैडर होने से एक समान OROP फॉर्मूला लागू करना जटिल माना जा रहा है।डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया कि 2026 से पहले रिटायर होने वालों में OPS (अनफंडेड) और NPS/UPS (फंडेड) दोनों हैं। चूंकि UPS भी सेवा अवधि और अंतिम बेसिक पे पर आधारित गारंटीड सिस्टम है, इसलिए नए फिटमेंट फैक्टर का लाभ OPS और NPS/UPS दोनों तरह के रिटायरीज को समान रूप से मिलना चाहिए ताकि विषमता पैदा न हो।
परिवहन विभाग ने बढ़ाई फीस: ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर परमिट तक सब हुआ महंगा,बस परमिट में 4 गुना वृद्धि
10 महीने में कई राज्यों का दौरा पूरा, 7-8 अक्टूबर को बेंगलुरु में मंथन
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने मिले थे, जिसमें से 10 महीने पूरे हो चुके हैं और अब सिर्फ 8 महीने बचे हैं।
आयोग अब तक दिल्ली, लद्दाख, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ का दौरा कर चुका है। अब आयोग का अगला पड़ाव 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में होगा, जहां दक्षिण भारत के कर्मचारी संगठनों व पेंशनर्स के साथ सीधी बातचीत होगी। संभावना जताई जा रही है कि आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप देगा।


