हिंदू परंपरा में प्रकृति के प्रति अटूट आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाने वाला चैती छठ महापर्व इस साल मार्च के महीने में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भगवान सूर्य और षष्ठी मैया को समर्पित यह महापर्व साल में दो बार आता है, जिसमें वसंत ऋतु के दौरान मनाया जाने वाला चैती छठ विशेष रूप से सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना के लिए फलदायी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में इस चार दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत 22 मार्च से होने जा रही है, जो 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगी।
महापर्व के पहले दिन यानी 22 मार्च को नहाय-खाय की परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें व्रती पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान के बाद शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेंगे। इसके अगले दिन 23 मार्च को खरना का पूजन होगा, जहाँ दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। खरना के साथ ही 36 घंटे का अत्यंत कठिन निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाता है, जिसमें व्रती पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते हैं।
पर्व के तीसरे दिन 24 मार्च को संध्या अर्घ्य का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के नदी और तालाबों के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ेगा। इस दिन अस्ताचलगामी यानी डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित कर संतान की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाएगी। महापर्व का समापन 25 मार्च को उषा अर्घ्य के साथ होगा, जहाँ उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य देने के बाद व्रती कच्चे दूध और प्रसाद के साथ अपना व्रत पूर्ण करेंगे। चार दिनों तक चलने वाला यह महापर्व नियम, संयम और अटूट विश्वास का सबसे बड़ा उदाहरण पेश करता है।

