रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ में अपनी लंबित मांगों को लेकर शासकीय और अर्ध-शासकीय कर्मचारियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के 16 हजार कोटवारों ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके तहत 3 जुलाई 2026 को राज्यभर के कोटवार तहसील स्तर पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, अपनी सेवा सुरक्षा और संविलयन की मांग को लेकर राज्य अतिथि शिक्षक कल्याण संघ ने भी उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है।
15 अगस्त तक का अल्टीमेटम
कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ के प्रांतीय संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के कोटवार 3 जुलाई को दोपहर 3 बजे तहसील स्तर पर एकत्रित होकर एक दिवसीय धरना देंगे और संबंधित तहसीलदार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
कोटवार एसोसिएशन के प्रांताध्यक्ष प्रेमकिशोर बाघ ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी शासन, प्रशासन और आम जनता की सेवा करने के बाद भी कोटवारों का न तो नियमितीकरण हुआ है और न ही उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा मिल पाया है। हमारे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और स्वास्थ्य के लिए शासन के पास कोई योजना नहीं है। यदि 15 अगस्त तक हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदेशभर के 16 हजार कोटवार राज्यव्यापी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
कोटवारों की प्रमुख मांगें:
-
कोटवारों को नियमित कर स्कूल शिक्षा या राजस्व विभाग में संविलयन किया जाए।
-
प्रतिमाह कम से कम ₹15,000 वेतन का भुगतान सुनिश्चित हो।
-
कोटवारों की सेवानिवृत्ति या रिक्त पदों पर उनके परिवार के सदस्यों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जाए।



