मैनपाट में भीषड़ सड़क हादसा दो बाईक आपस में भिड़े 3 युवकों की मौत
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट में तेज रफ्तार और मॉडिफाइड साइलेंसर्स से हुड़दंग मचाने वाले बाइकर गैंग पर कमलेश्वरपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मौके से साठ बाइकों को जब्त कर उनके चालकों को गिरफ्तार किया है और इन सभी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया है।
दरअसल मैनपाट में पिछले कुछ समय से बाइकर गैंग की गतिविधियां काफी बढ़ गई थीं जहां ये युवक समूह बनाकर सड़कों पर बेहद तेज गति से बाइक चलाते थे और पटाखों जैसी आवाज वाले साइलेंसर्स का इस्तेमाल कर पर्यटकों व स्थानीय लोगों की शांति भंग कर रहे थे। इस हुड़दंग के कारण लगातार बढ़ रही जन शिकायतों को देखते हुए पुलिस ने पर्यटन स्थलों और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। कमलेश्वरपुर पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान कर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और बिना दस्तावेज, नियमों का उल्लंघन करने तथा खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के खिलाफ आगे भी यह चालानी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
क्या करना पूरी तरह गैरकानूनी है
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साइलेंसर बदलना (Modified Exhaust): कंपनियों द्वारा दिए गए ओरिजिनल साइलेंसर को हटाकर तेज पटाखे जैसी आवाज करने वाले आफ्टरमार्केट साइलेंसर लगाना पूरी तरह बैन है। केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार, दोपहिया वाहनों की आवाज 80 डेसिबल (dB) से अधिक नहीं होनी चाहिए। उल्लंघन करने पर ₹1,000 से लेकर ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है और पुलिस मौके पर ही साइलेंसर जब्त या नष्ट कर सकती है।
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इंजन और चेसिस में बदलाव: बाइक की इंजन क्षमता (cc) बढ़ाना, इंजन बदलना या गाड़ी के मुख्य ऊंचे-नीचे ढांचे (Chassis) को काटना या बदलना गंभीर अपराध माना जाता है।
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प्रेशर हॉर्न और फ्लैशर लाइट: सड़कों पर चलने वाले राहगीरों का ध्यान भटकाने वाले प्रेशर हॉर्न, मल्टी-टोन हॉर्न या तेज चमकने वाली रंग-बिरंगी एलईडी/स्ट्रोब लाइट्स लगाना प्रतिबंधित है।
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नंबर प्लेट से छेड़छाड़: फैंसी नंबर प्लेट लगाना, नंबरों का फॉन्ट या स्टाइल बदलना पूरी तरह गैरकानूनी है। केवल सरकारी मान्यता प्राप्त एचएसआरपी (HSRP) नंबर प्लेट ही मान्य है।
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क्या करने की अनुमति है
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सुरक्षा से जुड़े पार्ट्स: बाइक में क्रैश गार्ड (लेग गार्ड), साड़ी गार्ड, मोबाइल होल्डर और यूएसबी चार्जर जैसी जरूरी चीजें लगाना पूरी तरह वैध है।
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रंग बदलना (आरटीओ की अनुमति से): यदि आप अपनी बाइक का रंग बदलना चाहते हैं, तो आप ऐसा कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले आरटीओ (RTO) से अनुमति लेनी होगी और नई रंग की जानकारी को अपनी आरसी (RC) बुक में अपडेट करवाना अनिवार्य है।
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हल्के कॉस्मेटिक बदलाव: सीट कवर बदलना, छोटे-मोटे स्टिकर या ग्राफिक्स लगाना (जो नंबर प्लेट या सरकारी लोगो जैसी न दिखें) और कंपनी द्वारा निर्धारित साइज के ही टायर लगवाना वैध माना जाता है.
गैरकानूनी मॉडिफिकेशन पाए जाने पर न सिर्फ भारी चालान कटता है और गाड़ी जब्त हो सकती है, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में बीमा कंपनियां (Insurance) आपका क्लेम देने से भी पूरी तरह मना कर सकती हैं। यदि कोई बड़ा वैध बदलाव करना भी हो, तो हमेशा स्थानीय आरटीओ (RTO) से लिखित अनुमति लेने के बाद ही काम करवाना चाहिए।
पुलिस ने साफ किया है कि पकड़े गए सभी 60 वाहनों की जांच की जा रही है। जिन वाहनों के साइलेंसर मॉडिफाइड पाए गए हैं, उन्हें बदला जाएगा और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही, बिना वैध दस्तावेज (जैसे आरसी, बीमा, या ड्राइविंग लाइसेंस) के खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। धिकारियों का कहना है कि मैनपाट जैसे शांत और सुंदर पर्यटन स्थल पर बाहरी क्षेत्रों से आकर कुछ युवक ग्रुप बनाकर तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ाते हैं। मॉडिफाइड साइलेंसर्स से जो पटाखों जैसी तेज आवाज निकाली जाती है, उससे न केवल वहाँ आने वाले पर्यटकों को परेशानी होती है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीवों की शांति भी भंग होती है। ऐसे तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता, विशेषकर पालकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग या युवा बच्चों को तेज रफ्तार और मॉडिफाइड गाड़ियां लेकर सड़कों पर न जाने दें। इसके अलावा, पुलिस उन लोकल गैरेज और मैकेनिकों पर भी नजर रख रही है जो नियमों के खिलाफ जाकर बाइकों में ऐसे तेज आवाज वाले साइलेंसर फिट करते हैं। आने वाले दिनों में ऐसे दुकानदारों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।


