मुख्य सचिव की दोटूक: काम में देरी की तो नपेंगी एजेंसियां, ई-प्रगति पोर्टल पर अपलोड करनी होगी जियोटैग फोटो

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े तीन बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सरकार ने इस बैठक में कबाड़ के निपटारे से लेकर, भर्ती परीक्षाओं के प्रशासनिक ढांचे और सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों को बड़ी राहत देने का काम किया है।

कबाड़ बेचने के लिए एमएसटीसी से अनुबंध तीन साल और बढ़ा

​सरकारी दफ्तरों, निगमों और मंडलों में जमा कबाड़ और अनुपयोगी सामानों को पारदर्शी तरीके से बेचने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत भारत सरकार की कंपनी ‘मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड’ (MSTC) के साथ किए गए अनुबंध को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है, जो कि 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके ऑनलाइन ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के खरीदार बोली लगाते हैं, जिससे छत्तीसगढ़ सरकार को कबाड़ की सही और ज्यादा कीमत मिलती है। इसके अलावा अब सरकारी विभागों को अलग से टेंडर या विज्ञापन नहीं निकालना पड़ेगा, जिससे प्रशासनिक समय और संसाधनों की बचत होगी तथा दफ्तरों में साफ-सफाई और स्थान का प्रबंधन भी बेहतर होगा।

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कर्मचारी चयन मंडल अब सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन

​राज्य में होने वाली भर्ती परीक्षाओं को और अधिक सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल को अब सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए नियमों में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। गौरतलब है कि ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल अधिनियम, 2026’ लागू होने के बाद पुराने व्यापम (व्यावसायिक परीक्षा मण्डल) का विलय अब इस नए कर्मचारी चयन मंडल में हो चुका है और व्यापम की सभी संपत्तियां तथा देनदारियां भी अब इसी मंडल के पास आ गई हैं।

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डामर महंगा होने पर ठेकेदारों को राहत, नहीं रुकेगा सड़कों का काम

​वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ने से सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला डामर (बिटुमिन) अचानक बहुत महंगा हो गया है। डामर की कीमतें बढ़ने से राज्य में सड़क निर्माण और मरम्मत का काम रुकने का खतरा पैदा हो गया था, जिसे देखते हुए सरकार ने ठेकेदारों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि 1 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 के बीच काम करने वाले अनुबंधित ठेकेदारों को डामर की बढ़ी हुई कीमतों के नुकसान से बचाने के लिए एक तय फार्मूले के तहत आंशिक मुआवजा दिया जाएगा। भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने भी राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ऐसी ही राहत दी है, और राज्य सरकार का मकसद भी यही है कि पैसों की कमी या महंगाई के कारण सड़कों का विकास कार्य न रुके और जनता को समय पर अच्छी सड़कें मिल सकें।

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