रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें प्रदेश भर में पंचायत सचिवों के पदों की वर्तमान स्थिति का खुलासा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल 33 जिलों में पंचायत सचिवों के स्वीकृत 11,079 पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 10,228 सचिव ही कार्यरत हैं। इसका सीधा अर्थ है कि पूरे प्रदेश में 851 पद अब भी खाली पड़े हैं।
विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, जिलों के बीच पदों की रिक्तियों में काफी असमानता देखी गई है। जहाँ एक ओर कोरिया जिला अपनी शत-प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रहा है और वहाँ एक भी पद खाली नहीं है, वहीं दूसरी ओर कांकेर और जशपुर जैसे जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कांकेर जिले में सर्वाधिक 54 पद रिक्त हैं, जबकि जशपुर में 50 पदों पर नियुक्तियां होनी बाकी हैं। इसी तरह दंतेवाड़ा में 48 और रायगढ़ व बलौदाबाज़ार जैसे बड़े जिलों में 40-40 पद खाली होने से प्रशासनिक कार्यों का बोझ बढ़ गया है।
मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों की बात करें तो रायपुर में 26, बिलासपुर में 32 और दुर्ग में 20 पद रिक्त चल रहे हैं। बस्तर संभाग के सुकमा और बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी क्रमशः 28 और 10 पदों पर सचिवों की कमी बनी हुई है। ग्रामीण प्रशासन में पंचायत सचिव की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान होती है; ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से मनरेगा, पेंशन वितरण और अन्य बुनियादी विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति धीमी होने की संभावना है। प्रशासन के सामने अब इन रिक्तियों को भरकर ग्रामीण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की बड़ी चुनौती है।



