*संवाददाता उमेश कुमार प्रजापति* सरगुजा जिले के बतौली थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-NH 43 पर हुए एक सड़क हादसे के बाद दुर्घटनाग्रस्त ट्रक से बैटरी, डीजल और अन्य सामान चोरी होने का मामला सामने आया है। घटना के बाद ट्रक मालिक को हजारों रुपए का नुकसान हुआ है। हादसे के बाद भी हाईवे किनारे खड़े ट्रक की सुरक्षा नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे बतौली के नदीपार हाई स्कूल के पास मुख्य सड़क पर खड़े एक अज्ञात ट्रेलर से कोयला लोड ट्रक (क्रमांक CG 10 BU 7792) की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि ट्रेलर चालक सड़क किनारे वाहन खड़ा कर किराना दुकान पर सामान लेने गया था। अंधेरा होने और सामने से आ रहे वाहन की तेज रोशनी के कारण ट्रक चालक को खड़ा ट्रेलर दिखाई नहीं दिया और ट्रक सीधे पीछे से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक के परखच्चे उड़ गए और उसका अगला हिस्सा दो हिस्सों में बंट गया। हादसे के बाद ट्रेलर चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया।
हादसे में ट्रक के खलासी शिवा (20) वर्ष निवासी शहडोल (मध्यप्रदेश), गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं तथा बायां पैर भी टूट गया। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल से शहडोल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं ट्रक चालक गौरी शंकर चतुर्वेदी, निवासी अनुपपुर (मध्यप्रदेश), बाल-बाल बच गए।
*इलाज कराने गया चालक, पीछे से चोरों ने किया हाथ साफ*
ट्रक मालिक के अनुसार, ट्रक मध्यप्रदेश से कोयला लेकर ओडिशा जा रहा था। हादसे के बाद चालक घायल खलासी को इलाज के लिए अंबिकापुर ले गया। इस दौरान दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को पुलिस की जानकारी में होने के बाद भी हाईवे किनारे खड़ा रखा गया।
आरोप है कि इसी दौरान अज्ञात चोर ट्रक से दो बैटरियां, जैक, व्हील पाना, 5 लीटर का गैस सिलेंडर, साउंड सिस्टम तथा करीब 130 लीटर डीजल चोरी कर ले गए। चोरी की इस घटना से ट्रक मालिक को हजारों रुपए का नुकसान हुआ है।
*पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल*
घटना रिहायशी इलाके और व्यस्त नेशनल हाईवे पर हुई। इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त वाहन से सामान चोरी हो जाना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि हादसे के बाद पुलिस की ओर से वाहन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती, तो चोरी की घटना नहीं होती। अब इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।


