मौसम में आ रहे बदलाव, हवा में बढ़ी नमी और तापमान के लगातार उतार-चढ़ाव ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बदलते मौसम के बीच वायरस अत्यधिक सक्रिय और आक्रामक हो चुके हैं, जिससे मौसमी बीमारियों ने पांव पसार लिए हैं। स्थिति यह है कि इन दिनों हर पांचवां से छठवां व्यक्ति सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण से पीड़ित नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सिम्स) समेत बिलासपुर के तमाम सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी (OPD) में मरीजों की भारी कतारें लग रही हैं।
सिम्स में रोजाना 2000 से अधिक मरीज, 25% अकेले मौसमी फ्लू के शिकार
अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार, इन दिनों रोजाना की ओपीडी संख्या 2,000 के पार पहुंच चुकी है:
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सर्दी-खांसी के सबसे ज्यादा मरीज: कुल मरीजों में से करीब 20 से 25 प्रतिशत मरीज केवल सर्दी, खांसी, लगातार छींकें, नाक बहना, गले में खराश और बदन दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।
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मेडिसिन वार्ड में सबसे ज्यादा दबाव: सिम्स के मेडिसिन ओपीडी में सुबह से ही मरीजों का तांता लगा रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि कई मामलों में तेज बुखार नहीं आ रहा है, लेकिन मरीज अत्यधिक कमजोरी, बदन दर्द और सूखी खांसी से हलकान हैं।
ठीक होने में लग रहा 10 से 14 दिन का लंबा समय
आमतौर पर मौसमी फ्लू या वायरल संक्रमण तीन से पांच दिनों में ठीक हो जाता है, लेकिन इस बार का स्ट्रेन काफी जिद्दी और शक्तिशाली साबित हो रहा है:दवाएं लेने के बावजूद मरीजों को पूरी तरह रिकवर होने में 10 से 14 दिन (दो सप्ताह) का समय लग रहा है।
संक्रमण का असर खत्म होने के बाद भी मरीज लंबे समय तक पोस्ट-वायरल थकान, सुस्ती और जोड़ों के दर्द से जूझ रहे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सभी जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
विशेषज्ञ की चेतावनी: मनमर्जी से न लें एंटीबायोटिक
सिम्स के एमएस एवं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. लखन सिंह ने बताया कि इस बार का वायरल संक्रमण पिछले वर्षों की तुलना में अधिक संक्रामक और लंबे समय तक बने रहने वाला है। उन्होंने लोगों को आगाह किया है कि मौसम के इस दौर में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। सर्दी-खांसी या गले में खराश होने पर मेडिकल स्टोर से खुद जाकर एंटीबायोटिक दवाएं न खरीदें। बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक लेना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
वायरल संक्रमण से बचाव और जरूरी सावधानियां
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भीड़भाड़ से दूरी व मास्क: सार्वजनिक जगहों पर जाने से बचें; भीड़ में निकलते समय अच्छी गुणवत्ता का मास्क जरूर पहनें।
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हाथों की स्वच्छता: बार-बार साबुन-पानी से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें। बिना हाथ धोए आंख, नाक और चेहरे को न छुएं।
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खानपान में परहेज: ठंडी चीजें, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और बाहर के खुले-तले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करें।
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इम्युनिटी और आराम: रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ताजे मौसमी फल, हरी सब्जियां और गुनगुना पानी लें। शरीर को रिकवर करने के लिए 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद जरूर लें।

