रायपुर और आसपास के जिलों में रसोई गैस (LPG) की थोक आपूर्ति व्यवस्था में आने वाले कुछ वर्षों में ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्रमुख एलपीजी बॉटलिंग संयंत्रों को आपस में जोड़ने के लिए लगभग 555 किलोमीटर लंबी अत्याधुनिक पाइपलाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद बॉटलिंग प्लांटों तक गैस पहुंचाने के लिए लंबी दूरी तय करने वाले भारी सड़क टैंकरों पर निर्भरता काफी हद तक खत्म हो जाएगी और गैस की निर्बाध सप्लाई सीधे भूमिगत पाइपलाइन के जरिए संभव होगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत दोनों राज्यों के कुल छह एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिनकी कुल वार्षिक क्षमता करीब 5.4 लाख टन है। इसमें राजधानी रायपुर क्षेत्र के तीन प्रमुख संयंत्र शामिल हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 2.7 लाख टन सालाना आंकी गई है। ये तीनों बॉटलिंग प्लांट सिलतरा, मंदिर हसौद और तिल्दा क्षेत्र के खपरी में स्थित हैं। पाइपलाइन सीधे इन संयंत्रों तक पहुंचने से सिलेंडरों में गैस भरने की प्रक्रिया तेज होगी और स्थानीय स्तर पर गैस की किल्लत जैसी समस्याओं से पूरी तरह निजात मिलेगी।
सड़क परिवहन के नजरिए से भी यह पाइपलाइन एक गेम-चेंजर साबित होगी। आंकड़ों के मुताबिक, आगामी 25 वर्षों में हाईवे पर दौड़ने वाले एलपीजी बुलेट टैंकरों के करीब 8 लाख फेरे कम हो जाएंगे। भारी वाहनों की संख्या घटने से राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सड़क हादसों का जोखिम कम होगा, ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और वाहनों से होने वाले भारी कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही, बारिश या अन्य प्राकृतिक अवरोधों के दौरान भी बिना किसी रुकावट के गैस की सुरक्षित और सतत आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।



