रायपुर:
राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए साड़ी की संचालनालय स्तर पर होने वाली केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर सामने आए विभिन्न मुद्दों और प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब साड़ियों की सेंट्रलाइज्ड टेंडर या खरीदी व्यवस्था के बजाय इसके लिए निर्धारित राशि सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस नए फैसले से प्रदेश के करीब साढ़े बावन हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को बड़ी राहत मिलेगी और वे अपनी पसंद तथा जरूरत के हिसाब से साड़ी खरीद सकेंगी।
केंद्र सरकार की योजना और बजट प्रावधान
केंद्र सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी अमले को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म दी जाती हैं। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम पांच सौ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। सरकार के इस कदम से अब यह पूरी राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचेगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर कपड़ों के चयन में आसानी होगी।
रंग और डिजाइन में रहेगी एकरूपता, कपड़े का चयन खुद करेंगी कार्यकर्ताएं
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि भले ही खरीदी की व्यवस्था बदली जा रही है, लेकिन साड़ियों का रंग और डिजाइन पूर्ववत ही रखा जाए। इसके अंतिम स्वरूप को तय करने से पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से व्यापक परामर्श किया जाएगा। पूरे प्रदेश में एकरूपता बनाए रखने के लिए साड़ी का रंग और डिज़ाइन विभागीय स्तर पर निर्धारित कर उसकी पूरी जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत साड़ी का रंग और डिजाइन तो तय रहेगा, लेकिन उसके कपड़े की गुणवत्ता का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं अपनी सुविधा के अनुसार कर सकेंगी।
व्यवस्थाओं में सुधार की सतत प्रक्रिया
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस निर्णय पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि विभाग में वर्षों से चली आ रही पुरानी व्यवस्थाओं की सतत समीक्षा की जा रही है। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य काम को आसान और पारदर्शी बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी विभाग के कामकाज में जहां कहीं भी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वहां नियमों के दायरे में रहते हुए आवश्यक बदलाव तुरंत किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार का यह कदम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आत्मनिर्भरता देने के साथ-साथ खरीदी प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मददगार साबित होगा। तय रंग-रूप और व्यक्तिगत पसंद के इस मेल से विभागीय एकरूपता भी बनी रहेगी और कर्मचारियों को अपनी पसंद का कपड़ा चुनने की आजादी भी मिलेगी।

