नई दिल्ली:

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नौवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक और व्यापक बदलाव किए हैं। नए सत्र से कक्षा नौवीं के छात्र न सबसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों यानी चारों वेदों का अध्ययन करेंगे, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास के सबसे विवादास्पद दौर आपातकाल (इमरजेंसी) के बारे में भी विस्तार से जानेंगे। NCERT द्वारा सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक ‘अंडरस्टेंडिंग सोसाइटी : इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-एक’ जारी की जा रही है, जो पूरी तरह व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण पर आधारित है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और चारों वेदों का समावेश

नौवीं कक्षा के छात्र पहली बार अपनी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की समृद्ध परंपरा को पढ़ेंगे। वेद भारतीय सभ्यता और संस्कृति के मूल आधार हैं, जिनमें निहित धर्म, दर्शन, समाज, शिक्षा, संगीत और जीवन-मूल्यों से छात्रों को अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही पुस्तक के पहले अध्याय में दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से पंचमहाभूत यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की अवधारणा को समझाया गया है, ताकि छात्र प्रकृति और मानव जीवन के गहरे अंतर्संबंधों को आसानी से समझ सकें।

तीन भाषाओं की अनिवार्यता और मातृभाषा में वर्कशीट

सत्र के मध्य में जुलाई से नौवीं कक्षा में तीन भाषाओं की पढ़ाई को अनिवार्य कर दिया गया है। बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से NCERT पहली बार अपनी किसी पाठ्यपुस्तक में मातृभाषा में वर्कशीट तैयार करा रहा है। आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पाठों में इस थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूले को जोड़ा गया है, जहाँ छात्र इंटरनेट शोध और अपने निजी अनुभवों के आधार पर अपनी मातृभाषा में ही वर्कशीट की जानकारियों को पूरा करेंगे।

आपातकाल और लोकतंत्र का विवादास्पद दौर

भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादास्पद दौर ‘इमरजेंसी’ से अब नौवीं के छात्र भी रूबरू होंगे, जबकि पहले यह पाठ ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम का हिस्सा हुआ करता था। छात्र अब कम उम्र में ही यह समझ पाएंगे कि पच्चीस जून उन्नीस सौ पचहत्तर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर देश में आपातकाल क्यों लागू किया गया था। इस पाठ के जरिए छात्र उस दौर में बिना मुकदमे के हजारों लोगों को जेल में डालने, समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाने, असहमति को अपराध मानने और नागरिक स्वतंत्रताओं पर लगे अभूतपूर्व अंकुश जैसे लोकतांत्रिक संकटों के इतिहास को गहराई से समझेंगे।

समसामयिक भौगोलिक आपदाएं और पंजाब की बाढ़

आपदा प्रबंधन के तहत छात्रों को केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए वास्तविक केस स्टडीज को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। छात्र हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले भूस्खलन की भौगोलिक स्थितियों को जानेंगे। इसके साथ ही वर्ष 2025 में पंजाब में आई भीषण बाढ़ को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसमें केस स्टडी के जरिए विस्तार से बताया गया है कि सतलुज, व्यास और रावी नदियों ने किस तरह पंजाब में कृषि, मुर्गी पालन उद्योग और जान-माल को भारी नुकसान पहुँचाया। पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में पानी भरने और बाढ़ से हुए लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान पर छात्र अपनी मातृभाषा में केस स्टडी लिखेंगे।

NCERT की यह नई पहल पारंपरिक रट्टा मार प्रणाली को पूरी तरह खत्म कर छात्रों को समाज, इतिहास, भूगोल और लोकतंत्र की व्यावहारिक समझ देने का एक बड़ा प्रयास है। प्राचीन विरासत और आधुनिक इतिहास का यह अनूठा संगम छात्रों के बौद्धिक विकास को एक नई दिशा देगा।

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