रंगीन पापड़ पर बैन: तमिलनाडु सरकार ने सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल होने की पुष्टि के बाद रंगीन पापड़ की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य के फूड सेफ्टी विभाग की जांच में पाया गया कि कई उत्पादों में ऐसे आर्टिफिशियल फूड कलर्स मिलाए जा रहे थे, जिनकी अनुमति नहीं है। विभाग ने इन्हें खासतौर पर बच्चों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बताया है।
- क्यों लगाया गया बैन?
फूड सेफ्टी अधिकारियों के अनुसार कई रंगीन पापड़ों में गैर-अनुमोदित सिंथेटिक फूड कलर्स पाए गए। ऐसे रंग FSSAI के मानकों के खिलाफ हैं और लंबे समय तक सेवन करने पर स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। इसी वजह से सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनकी बिक्री पर रोक लगाई गई।
- सिंथेटिक कलर से क्या हो सकते हैं नुकसान?
विशेषज्ञों के अनुसार अधिक मात्रा में आर्टिफिशियल फूड कलर का सेवन करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जैसे-
- किडनी और लिवर पर बुरा असर
- एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं
- पाचन संबंधी दिक्कतें
- बच्चों में हाइपरएक्टिविटी का जोखिम
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर अधिक प्रभाव
- पापड़ खरीदते समय इन 6 बातों का रखें ध्यान
- पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें।
- बहुत चमकीले या असामान्य रंग वाले पापड़ खरीदने से बचें।
- लेबल पर इस्तेमाल किए गए फूड कलर की जानकारी पढ़ें।
- एक्सपायरी डेट और पैकिंग की स्थिति जांचें।
- भरोसेमंद ब्रांड या विक्रेता से ही खरीदें।
- बच्चों को रंगीन स्नैक्स सीमित मात्रा में ही दें।
- रंगीन पापड़ की जगह क्या खाएं?
- भुना हुआ दाल का पापड़
- मखाना
- भुना चना
- मूंग दाल स्नैक्स
- घर में बने प्राकृतिक रंगों वाले पापड़
FSSAI के नियमों के अनुसार केवल अनुमोदित फूड कलर्स का ही निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी भी खाद्य पदार्थ में गैर-अनुमोदित रंग या तय सीमा से अधिक रंग मिलाना नियमों का उल्लंघन है। इसलिए उपभोक्ताओं को पैकेजिंग और लेबल की जानकारी पढ़कर ही उत्पाद खरीदना चाहिए।


