कैल्शियम बच्चों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने के लिए बेहद जरूरी होता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खून में कैल्शियम का स्तर सामान्य से अधिक हो जाने की स्थिति को हाइपरकैल्सीमिया (Hypercalcemia) कहा जाता है। यह समस्या बच्चों में कम देखने को मिलती है, लेकिन समय पर पहचान और इलाज न होने पर किडनी, हड्डियों और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पैराथायराइड हार्मोन (PTH), कैल्सीटोनिन और विटामिन D मिलकर कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करते हैं। इनमें गड़बड़ी होने पर Hypercalcemia की समस्या हो सकती है।
- बच्चों में Hypercalcemia के प्रमुख कारण
- विटामिन D सप्लीमेंट की अधिक मात्रा लेना
- पैराथायराइड हार्मोन का अधिक बनना
- गंभीर डिहाइड्रेशन
- किडनी की बीमारी
- कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन
- दुर्लभ आनुवंशिक (Genetic) रोग
2. किन बच्चों को ज्यादा खतरा?
- पैराथायराइड ग्रंथि की बीमारी वाले बच्चे
- किडनी रोग से पीड़ित बच्चे
- जरूरत से ज्यादा कैल्शियम या विटामिन D सप्लीमेंट लेने वाले बच्चे
- लंबे समय तक दवा लेने वाले बच्चे
- जेनेटिक बीमारी से प्रभावित बच्चे
3. Hypercalcemia के लक्षण
- थकान और कमजोरी
- बच्चे का सुस्त रहना
- भूख कम लगना
- कब्ज
- उल्टी या मतली
- पेट दर्द
- हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द
- ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना
- गंभीर मामलों में किडनी को नुकसान
4. कैसे होती है जांच?
डॉक्टर जरूरत के अनुसार सीरम कैल्शियम टेस्ट, विटामिन D टेस्ट, PTH टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, यूरिन कैल्शियम टेस्ट, एक्स-रे, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं। बच्चों में सामान्य कैल्शियम स्तर 8.5 से 10.5 mg/dL माना जाता है।
5. इलाज और बचाव
हल्के मामलों में डॉक्टर पानी और तरल पदार्थ अधिक लेने, कैल्शियम या विटामिन D सप्लीमेंट बंद करने या दवा बदलने की सलाह दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कर IV फ्लूइड और दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
बचाव के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चों को विटामिन D या कैल्शियम सप्लीमेंट न दें, पर्याप्त पानी पिलाएं और यदि बच्चा बार-बार उल्टी करे, बहुत सुस्त रहे या खाना न खाए तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

