नई दिल्ली: पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बैंक कर्मचारी यूनियनों ने आज शुक्रवार से देशव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज पर पड़ने की आशंका है, जिससे शाखाओं में नकदी जमा, निकासी और चेक क्लीयरेंस जैसी जरूरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
हड़ताल और इसके बाद पड़ने वाली छुट्टियों के चलते कई राज्यों में लगातार चार दिन तक बैंक बंद रह सकते हैं। आज हड़ताल के बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार और रविवार का नियमित बैंक अवकाश रहेगा, जबकि 14 सितंबर को कुछ राज्यों में गणेश चतुर्थी की छुट्टी रहेगी। इस तरह ग्राहकों को अगले कुछ दिनों तक शाखा स्तर पर काम निपटाने में भारी परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
अधिकांश सरकारी बैंकों ने इस संभावित व्यवधान को लेकर ग्राहकों को पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने बयान में कहा है कि शाखाओं और कार्यालयों में सामान्य कामकाज जारी रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए हैं, फिर भी हड़ताल के असर से काम प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
इधर सात प्रमुख बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है। संगठन ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 28 सितंबर से तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल की जाएगी, जो बैंकों की छमाही खाताबंदी (हाफ-इयरली क्लोजिंग) के समय होगी और इससे वित्तीय तंत्र पर और गहरा असर पड़ सकता है।


