जशपुरनगर | 27 दिसम्बर 2025
जशपुर जिले से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित आरक्षित एवं संरक्षित वन भूमि में वृक्षों पर छाल उतारने, कटाव करने तथा पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाने की घटनाएँ सामने आई हैं। इस पर वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गंभीर अपराध करार दिया है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित वन क्षेत्र में वृक्षों पर गर्डलिंग करना, कील या तार ठोंकना, पोस्ट-बैनर लगाना अथवा किसी भी प्रकार से वन संपदा को क्षति पहुँचाना भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से दण्डनीय अपराध है। ऐसे कृत्य न केवल वृक्षों की जैविक संरचना को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे विकसित हरित पट्टी को भी गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
वनमण्डलाधिकारी जशपुर वनमण्डल श्री शशि कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे आरक्षित एवं संरक्षित वन क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान शुरू कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान जहाँ भी वृक्षों पर गर्डलिंग या पोस्ट-बैनर लगाए पाए जाएंगे, वहाँ तत्काल जप्ती कर प्रकरण पंजीबद्ध किया जाएगा तथा दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर बैनर या पोस्टर हटाने में हुए खर्च की वसूली भी संबंधित व्यक्ति या संस्था से की जाएगी।
वन विभाग ने विज्ञापन एजेंसियों, ठेकेदारों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि वन भूमि या वन वृक्षों पर किसी भी प्रकार का पोस्ट, बैनर, होर्डिंग या अन्य संरचना न लगाएँ। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कठोर दण्डात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे वन संपदा के संरक्षण में सक्रिय सहयोग करें। यदि कहीं भी इस प्रकार की अवैध गतिविधि दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी वन कार्यालय को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर जिले की हरित धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।



