नई दिल्ली | 29 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य के चुनौतीपूर्ण हालातों के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखने के लिए ‘वार-फुटिंग’ पर काम शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और जनता को किसी भी तरह की घबराहट में खरीदारी या सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अफवाहों पर विश्वास न करने की सख्त सलाह दी गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं ताकि घरेलू खपत में कोई बाधा न आए। विशेष रूप से रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिसके तहत लगभग 94,000 मीट्रिक टन कार्गो लेकर दो बड़े एलपीजी वाहक जहाज, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम, सुरक्षित रूप से भारतीय तटों की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक जहाज 31 मार्च को मुंबई और दूसरा 1 अप्रैल को न्यू मैंगलोर पहुँचने की उम्मीद है।
घरेलू स्तर पर एलपीजी की निर्भरता कम करने के लिए मार्च के दौरान रिकॉर्ड 2.9 लाख से अधिक नए पीएनजी कनेक्शनों का गैसीकरण किया गया है, जिसमें स्कूलों, हॉस्टलों और कैंटीनों को प्राथमिकता दी जा रही है। यूरिया संयंत्रों को भी गैस की आपूर्ति स्थिर रखी गई है ताकि कृषि उत्पादन पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। इसके अतिरिक्त, सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती कर आम जनता को राहत दी है, जबकि घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात शुल्कों में वृद्धि की गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में अब तक 2,900 से अधिक छापेमारी की जा चुकी है और दोषी वितरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन पूरी तरह सामान्य बना हुआ है और माल की आवाजाही में कहीं भी भीड़भाड़ या रुकावट की सूचना नहीं है।
विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। विदेश मंत्रालय और नौवाहन महानिदेशालय का कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है और अब तक 942 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित की गई है। फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा जा रहा है और मिशन द्वारा उन्हें वीजा व लॉजिस्टिकल सहायता प्रदान की जा रही है। हवाई यात्रा के मोर्चे पर, यूएई और ओमान से उड़ानें सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि कुवैत और बहरीन जैसे देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने की स्थिति में भारतीयों को सऊदी अरब के रास्ते वापस लाने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संकट की इस घड़ी में खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण उनकी पहली प्राथमिकता है और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हर संभव राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं।


