जशपुर जिले के बगीचा जनपद के अंतर्गत सन्ना और पण्डरापाठ ग्राम पंचायतों में सरपंचों के खिलाफ वित्तीय भ्रष्टाचार, शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।
सन्ना ग्राम पंचायत में सरपंच अरविंद कुजूर के खिलाफ उप-सरपंच, वार्ड पंचों और ग्रामीणों ने लामबंद होकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरपंच द्वारा शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही बरती जा रही है और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। सरपंच पर निर्माण कार्यों में नियमों का उल्लंघन करने, फर्जी एस्टीमेट तैयार करने का दबाव बनाने और एक ही कार्य के लिए दो बार राशि का आहरण करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने सरपंच पर ग्राम सन्ना की खसरा नंबर 1735/1 वाली शासकीय निस्तार भूमि पर अवैध कब्जा कर अपना मकान निर्माण करने का आरोप लगाया है, जिससे आम जनता को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में तहसीलदार द्वारा स्थगन आदेश भी जारी किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत सरपंच को पद से पृथक करने की मांग की है।
दूसरी ओर, पण्डरापाठ ग्राम पंचायत में सरपंच श्री शंकर राम पर लाखों रुपये के गबन का आरोप लगा है। जनपद पंचायत बगीचा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दी गई शिकायत में यह स्पष्ट किया गया है कि यहां के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हैं। आरोप है कि कन्या आश्रम चुन्दापाठ और प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में किचन शेड निर्माण के लिए लाखों रुपये की अग्रिम राशि आहरित की गई, लेकिन निर्माण कार्य आज तक अधूरे पड़े हैं। इसी तरह मनरेगा योजना के अंतर्गत तेन्दपाठ से अम्बापकरी पहुंच मार्ग निर्माण में भी फर्जीवाड़े का खेल सामने आया है, जहां GST बिलों का सहारा लेकर बड़ी राशि का गबन किया गया और वास्तविक कार्य करने वाले को उसका मेहनताना तक नहीं मिला। इसके अलावा, हेटसेमरा में नाली निर्माण के नाम पर बिना कोई धरातलीय कार्य किए फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी राशि निकाल ली गई। शिकायतकर्ताओं का यह भी दावा है कि इन भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने और जांच को प्रभावित करने के लिए सरपंच द्वारा पंचायत सचिव को साजिश के तहत हटवाने का प्रयास किया जा रहा है।
इन दोनों पंचायतों के ग्रामीणों ने जशपुर कलेक्टर, जिला पंचायत और जनपद पंचायत बगीचा के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों की जांच नहीं हुई, तो सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक नहीं पहुँच पाएगा।
समाचार में उल्लेखित सभी आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इन मामलों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।)

