नई दिल्ली | 16 मई 2026

​केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 और 10 के लिए नई भाषा शिक्षा प्रणाली की घोषणा की है। 15 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक परिपत्र (Circular) के अनुसार, यह संशोधित भाषा संरचना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम (NCF-SE) 2023 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है।

​यह नई नीति 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं में पूरी तरह लागू हो जाएगी।

​क्या है नया भाषा फॉर्मूला? (R1, R2 और R3)

​नए नियमों के मुताबिक, अब कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं (R1, R2 और R3) पढ़ना अनिवार्य होगा। इस फॉर्मूले की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  • दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: चुनी गई तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय मूल का होना अनिवार्य है।
  • विदेशी भाषा पर नियम: यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ने का इच्छुक है, तो वह इसे केवल तीसरी भाषा (R3) के रूप में ही चुन सकता है, बशर्ते पहली दो भाषाएं (R1 और R2) भारतीय हों। इसके अलावा, विदेशी भाषा को एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है।
  • स्कूलों को स्वायत्तता: स्कूलों को सीबीएसई द्वारा सूचीबद्ध भाषाओं में से चयन करने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाएं जरूर पढ़ें।

​मूल्यांकन और बोर्ड परीक्षा के नियम

​बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव से छात्रों पर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाएगा:

कक्षा 10वीं में R3 की बोर्ड परीक्षा नहीं: तीसरी भाषा (R3) के लिए कक्षा 10वीं में कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह से स्कूल स्तर पर (आंतरिक मूल्यांकन) होगा।

 

  • प्रमाणपत्र में दर्ज होंगे अंक: R3 भाषा में छात्र का प्रदर्शन उनके सीबीएसई बोर्ड प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा। हालांकि, इसमें कम अंक आने या अनुत्तीर्ण होने पर भी किसी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा।
  • जल्द आएंगे सैंपल पेपर: बोर्ड जल्द ही R3 के लिए सैंपल पेपर और आंतरिक मूल्यांकन के मानदंड जारी करेगा। स्कूलों को 30 जून 2028 तक ओएसिस (OASIS) पोर्टल पर R3 विषय की जानकारी अपडेट करनी होगी।

​विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को छूट

​दिव्यांग छात्रों की सुविधा का ध्यान रखते हुए, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को ‘राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज’ (RPwD) अधिनियम 2016 के तहत आवश्यक छूट दी जाएगी। इसमें जरूरत पड़ने पर छात्रों को दूसरी या तीसरी भाषा के अध्ययन से छूट का प्रावधान भी शामिल है।

​संसाधन और शिक्षकों की कमी से निपटने के उपाय

​चूंकि यह एक बड़ा बदलाव है, इसलिए सीबीएसई ने स्कूलों के लिए कुछ विशेष दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं:

  • कक्षा 6 की किताबों से होगी पढ़ाई: जब तक R3 भाषा के लिए नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक छात्रों को कक्षा 6 (2026-27 संस्करण) की किताबों से पढ़ाया जाएगा। साथ ही कहानियों, कविताओं और गैर-काल्पनिक पूरक साहित्य को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
  • शिक्षकों की कमी का समाधान: यदि स्कूलों में योग्य भाषा शिक्षकों की कमी है, तो वे अन्य विषयों के शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन और साझा शिक्षण (Shared Learning) व्यवस्था अपना सकते हैं।
  • NCERT पुस्तकों का पालन: सभी स्कूलों को NCERT की नई पुस्तकों का पालन करना होगा, शिक्षकों को प्रशिक्षित करना होगा और छात्रों एवं अभिभावकों को इस बदलाव के प्रति जागरूक करना होगा।

​छात्र और स्कूल इस संबंध में अधिक और विस्तृत जानकारी के लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट CBSE Academic पर जा सकते हैं।

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