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परीक्षा पर चर्चा अब एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रह गया है बल्कि यह देश के शिक्षा परिदृश्य में एक व्यापक जन सहभागिता अभियान का रूप ले चुका है। हर वर्ष इसके दायरे में विस्तार हो रहा है और 2026 के आंकड़े इस बदलती सोच और बढ़ते भरोसे की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।

वर्ष 2025 में परीक्षा पर चर्चा के तहत छात्रों शिक्षकों और अभिभावकों को मिलाकर कुल 3 करोड़ 56 लाख से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए थे। यह संख्या अपने आप में ऐतिहासिक मानी गई थी और इसे शिक्षा संवाद की बड़ी सफलता के रूप में देखा गया। उस वर्ष यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा को लेकर संवाद और मार्गदर्शन की आवश्यकता को देशभर में गंभीरता से स्वीकार किया जा रहा है।

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इसी मजबूत आधार पर 2026 में परीक्षा पर चर्चा ने और ऊंची छलांग लगाई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2026 में कुल 4 करोड़ 30 लाख 18 हजार 173 लोगों ने इस पहल में भागीदारी दर्ज कराई। यह संख्या न केवल पिछले वर्ष से कहीं अधिक है बल्कि यह दर्शाती है कि कार्यक्रम के प्रति विश्वास लगातार गहराता जा रहा है।

इस कुल भागीदारी में 4 करोड़ 00 लाख 41 हजार 236 छात्र शामिल रहे जो यह संकेत देता है कि देश का युवा वर्ग अब परीक्षा को केवल दबाव के रूप में नहीं बल्कि संवाद और सीख के अवसर के रूप में देखने लगा है। छात्रों की यह भागीदारी परीक्षा पर चर्चा को उसकी मूल आत्मा प्रदान करती है।

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शिक्षकों की सहभागिता भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। 2026 में 24 लाख 03 हजार 234 शिक्षकों ने इस मंच से जुड़कर यह साबित किया कि परीक्षा के तनाव को कम करने में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। वहीं 5 लाख 73 हजार 703 अभिभावकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि अब परीक्षा केवल बच्चों का विषय नहीं रह गया है बल्कि पूरा परिवार इस प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा बन चुका है।

यदि 2025 और 2026 की तुलना की जाए तो कुल भागीदारी में करीब 74 लाख से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी केवल संख्या नहीं बल्कि सोच में आए बदलाव को भी दर्शाती है। यह बताती है कि परीक्षा पर चर्चा अब एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाला राष्ट्रीय संवाद बन चुका है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को बोझ नहीं बल्कि जीवन के उत्सव के रूप में देखने का संदेश वर्ष 2026 में और अधिक गहराई के साथ लोगों तक पहुंचा है। बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह विचार देश के हर कोने में स्वीकार किया जा रहा है।

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स्पष्ट है कि 2025 में रखी गई मजबूत नींव पर 2026 में परीक्षा पर चर्चा ने एक नई ऊंचाई हासिल की है। आज यह कार्यक्रम छात्रों शिक्षकों और अभिभावकों को जोड़ने वाला देश का सबसे बड़ा शैक्षणिक संवाद मंच बन चुका है और आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव के और विस्तार की पूरी संभावना है।

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