नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को लेकर ऐतिहासिक प्रगति हुई है। पिछले हफ्ते न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA – मुक्त व्यापार समझौता) 20 अक्टूबर से आधिकारिक तौर पर लागू होने जा रहा है। दशहरे से ठीक पहले लागू हो रहे इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार को नई ऊंचाई देना और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देना है।
भारतीय सामानों पर शून्य शुल्क, निर्यातकों की होगी बल्ले-बल्ले
इस मुक्त व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार पूरी तरह खोल रहा है:
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100% उत्पादों पर शुल्क-मुक्त प्रवेश: भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाले 100 फीसदी सामानों पर सीमा शुल्क (Customs Duty) पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
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इन सेक्टर्स को सीधा फायदा: अब तक न्यूजीलैंड द्वारा भारतीय सिरेमिक, कालीन (कार्पेट), ऑटोमोबाइल और गाड़ियों के कलपुर्जों (ऑटो कंपोनेंट्स) पर 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाया जाता था। शुल्क हटने से भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
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विलायती उत्पादों के दाम घटेंगे: इस समझौते से दोनों तरफ व्यापार सुगम होने से आयातित प्रीमियम उत्पादों की कीमतें भी नियंत्रित होंगी, जिसका लाभ घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा।
भारत में 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश करेगा न्यूजीलैंड
यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के बुनियादी ढांचे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विदेशी पूंजी प्रवाह को भी गति देगा:
न्यूजीलैंड ने इस समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का भारी-भरकम निवेश करने की आधिकारिक प्रतिबद्धता जताई है।इस निवेश से देश में विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, तकनीकी नवाचार और सेवा क्षेत्र में रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।



