Car Loan Tips: नई कार खरीदना हर किसी के लिए बड़ा फैसला होता है। कार की कीमत, डाउन पेमेंट और EMI पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है, लेकिन सिर्फ कम EMI देखकर कार लोन लेना आगे चलकर महंगा पड़ सकता है। कई बार लंबी लोन अवधि, अतिरिक्त चार्ज और कम डाउन पेमेंट के कारण ग्राहक को कार की वास्तविक कीमत से काफी ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है।
RBI के Key Facts Statement (KFS) नियमों के तहत रेगुलेटेड लेंडर्स को लोन की प्रमुख जानकारी और कुल लागत को आसान भाषा में उपलब्ध कराना होता है। KFS में लोन की लागत, APR और रिपेमेंट शेड्यूल जैसी जानकारी शामिल होती है।
1. सिर्फ कम EMI देखकर लोन लेना
कार खरीदते समय डीलर अक्सर ऐसी EMI बताता है जो सुनने में काफी कम लगती है। लेकिन कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता। अगर लोन की अवधि 3 साल की जगह 5 या 7 साल कर दी जाए तो आपकी मासिक EMI कम हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक ब्याज चुकाने के कारण कुल भुगतान बढ़ जाता है। इसलिए लोन लेने से पहले यह जरूर देखें कि पूरी अवधि में बैंक या NBFC को कुल कितनी रकम वापस करनी होगी।
2. डीलर के पहले लोन ऑफर को तुरंत स्वीकार करना
कार शोरूम में डीलर कई बैंक और NBFC के लोन विकल्प दिखा सकता है। ऐसे में सिर्फ सुविधा के लिए पहला ऑफर स्वीकार करना समझदारी नहीं है। अलग-अलग lenders की interest rate, processing fee और दूसरे charges अलग हो सकते हैं। इसलिए कम से कम 2-3 विकल्पों की तुलना करें। सिर्फ ब्याज दर नहीं, बल्कि लोन की पूरी लागत देखें।
3. बहुत कम डाउन पेमेंट करना
कम डाउन पेमेंट से शुरुआत में आपकी जेब पर कम बोझ पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आपको ज्यादा रकम का लोन लेना पड़ेगा। जितना बड़ा लोन होगा, उतने ज्यादा ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। हालांकि, डाउन पेमेंट बढ़ाने के चक्कर में अपनी पूरी बचत खत्म करना भी सही नहीं है।
4. KFS और दूसरे चार्ज को नजरअंदाज करना
कई खरीदार सिर्फ interest rate देखकर लोन फाइनल कर देते हैं और बाकी दस्तावेजों को ध्यान से नहीं पढ़ते। यही गलती बाद में महंगी पड़ सकती है। लोन लेने से पहले processing fee, documentation charges, insurance से जुड़े खर्च, penal charges और prepayment/foreclosure से जुड़े नियम जरूर जांचें। RBI के नियमों के अनुसार KFS में लागू शुल्क और लोन की लागत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। KFS में दर्ज नहीं किए गए शुल्क को सामान्यतः बाद में ग्राहक से वसूल नहीं किया जा सकता, जब तक ग्राहक की स्पष्ट सहमति न हो।
5. प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर के नियम नहीं देखना
भविष्य में आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है और आप कार लोन को समय से पहले खत्म करना चाह सकते हैं। ऐसे में पहले से यह जानना जरूरी है कि आपके लोन में part-payment या foreclosure के क्या नियम हैं। लोन साइन करने से पहले बैंक से लिखित रूप में पूछें कि समय से पहले भुगतान करने पर कोई शुल्क या अन्य शर्त लागू होगी या नहीं।
लोन फाइनल करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें
1. EMI नहीं, कुल भुगतान देखें
बैंक या डीलर से सिर्फ यह न पूछें कि हर महीने कितनी EMI देनी होगी। यह भी पूछें कि पूरे लोन की अवधि में कुल कितनी रकम चुकानी पड़ेगी। लोन की अवधि जितनी लंबी होगी, आमतौर पर ब्याज का कुल बोझ उतना ही बढ़ सकता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार कम अवधि का लोन चुनना फायदेमंद हो सकता है।
2. कम से कम 2-3 बैंकों की तुलना करें
शोरूम में मिले पहले ऑफर को तुरंत स्वीकार न करें। अलग-अलग बैंकों और NBFCs की interest rate, processing fee, APR और दूसरे charges की तुलना करें। कई बार थोड़ी कम ब्याज दर के साथ मिलने वाला दूसरा लोन कुल मिलाकर काफी सस्ता पड़ सकता है।
3. डाउन पेमेंट का सही संतुलन बनाएं
बहुत कम डाउन पेमेंट लेने से लोन की रकम बढ़ जाती है, जबकि पूरी बचत डाउन पेमेंट में लगा देना भी जोखिम भरा हो सकता है। ऐसा डाउन पेमेंट चुनें जिससे लोन की रकम कम रहे और इमरजेंसी के लिए पर्याप्त बचत भी बची रहे।
4. KFS को ध्यान से पढ़ें
लोन साइन करने से पहले बैंक से Key Facts Statement यानी KFS जरूर मांगें। इसमें लोन की महत्वपूर्ण शर्तें, लागत और लागू शुल्क की जानकारी मिलती है। सिर्फ मौखिक जानकारी पर भरोसा करने के बजाय सभी जरूरी charges और conditions लिखित दस्तावेज में जांचें।
5. Prepayment और Foreclosure की शर्त पहले जानें
अगर भविष्य में बोनस, सेविंग्स या अतिरिक्त आय मिलने पर आप लोन जल्दी खत्म करना चाहते हैं, तो पहले ही बैंक से पूछें कि part-payment या foreclosure के क्या नियम हैं। लोन एग्रीमेंट में इन शर्तों को पढ़कर ही साइन करें।
6. EMI के साथ कार का पूरा खर्च जोड़ें
कार खरीदने के बाद सिर्फ EMI नहीं देनी होती। Insurance, fuel, servicing, maintenance, parking और repair जैसे खर्च भी होते हैं। इसलिए कार खरीदने से पहले इन सभी खर्चों का अनुमान लगाएं और देखें कि EMI सहित पूरा मासिक खर्च आपकी आय के हिसाब से आरामदायक है या नहीं।
7. डीलर की EMI को तुरंत फाइनल न करें
डीलर द्वारा बताई गई EMI कई बार अलग-अलग लोन अवधि या डाउन पेमेंट के आधार पर हो सकती है। इसलिए पूछें कि लोन राशि, ब्याज दर, अवधि और कुल repayment amount कितना है।
सबसे जरूरी बात
कार लोन लेते समय कम EMI को सस्ता लोन न समझें। लोन की अवधि, कुल ब्याज, APR, KFS, processing fee और अन्य charges की तुलना करने के बाद ही फैसला लें। सही लोन वही है जिसकी कुल लागत कम हो और EMI आपकी आय के हिसाब से आसानी से मैनेज हो सके।


