नॉन-ट्रेड सीमेंट ₹60 और OPC ₹90 महंगा; ₹10 हजार करोड़ के सरकारी प्रोजेक्ट्स और PM आवास की लागत बढ़ेगी
रायपुर: देश के प्रमुख सीमेंट उत्पादक राज्यों में शुमार छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सीमेंट कंपनियों की मनमानी सामने आई है। बारिश के चलते बाजार में निर्माण कार्य सुस्त होने और मांग बेहद कम होने के बावजूद सीमेंट कंपनियों ने मानसून की विदाई से ठीक पहले कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है। कंपनियों ने दो चरणों में नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम में ₹60 प्रति बोरी की बढ़ोतरी कर दी है। इसके अलावा खुले बाजार (ट्रेड) में भी कीमतें ₹20 प्रति बोरी तक बढ़ाने की तैयारी चल रही है।
अचानक हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर छत्तीसगढ़ में चल रहे ₹10,000 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों और गरीबों के लिए बन रहे प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के मकानों पर पड़ेगा।
दो बार में ₹60 तक बढ़े नॉन-ट्रेड सीमेंट के दाम, OPC में ₹90 का उछाल
मानसून के बाद निर्माण कार्यों में गति आने से ठीक पहले कंपनियों ने सुनियोजित तरीके से दरें बढ़ाई हैं:
पहले 24 अगस्त को ₹40 की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद हाल ही में फिर ₹20 बढ़ा दिए गए। यानी कुल मिलाकर प्रति बोरी ₹60 (लगभग 30% तक) का सीधा उछाल आया है।बड़ी इमारतों, फ्लाईओवर और पुलों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) के दाम ₹270 से सीधे बढ़ाकर ₹360 प्रति बोरी (₹90 की वृद्धि) कर दिए गए हैं। वर्तमान में बाजार में थोक भाव ₹230 से ₹270 और चिल्हर भाव ₹240 से ₹280 प्रति बोरी चल रहा है, जिसे अब ₹20 और बढ़ाने की योजना है।
₹10,000 करोड़ के सरकारी प्रोजेक्ट्स पर संकट
छत्तीसगढ़ में इस समय कई मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी लागत अब सीमेंट के दाम बढ़ने से काफी बढ़ जाएगी: नवा रायपुर में नए राजभवन निर्माण सहित एनआरडीए (NRDA) की करीब ₹700 से ₹800 करोड़ की योजनाएं। डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल (मेकाहारा) में चार बड़ी बहुमंजिला इमारतों का निर्माण और प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों के ₹2,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स। प्रदेश भर में चल रहे कई हजार करोड़ रुपये की कंक्रीट सड़कों के निर्माण और गरीबों के पीएम आवास।
ठेकेदारों और बिल्डर्स में नाराजगी
बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (छत्तीसगढ़ शाखा) के अध्यक्ष रूपेश सिंघल ने इस मूल्यवृद्धि पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस कारण और बिना शासन को पूर्व सूचना दिए नॉन-ट्रेड सीमेंट में ₹60 (करीब 30%) की बढ़ोतरी कर दी गई है। मानसून के बाद जैसे ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू होंगे, बढ़ी हुई दरों के कारण हर सरकारी और निजी प्रोजेक्ट का एस्टीमेट गड़बड़ा जाएगा। इससे ठेकेदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और कई विकास कार्यों की गति धीमी हो सकती है।

