बिलासपुर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और गुजारा भत्ता (मेंटेनेंस) को लेकर एक बेहद सख्त और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि विवाह के बाद अगर किसी शादीशुदा महिला का दूसरे पुरुष से अवैध संबंध (व्यभिचार) है, तो वह अपने पति से गुजारा भत्ता वसूलने का कानूनी हक खो देगी। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में साफ किया कि धोखेबाज पत्नी को पति की गाढ़ी कमाई से वित्तीय सहायता पाने का कोई अधिकार नहीं है।
बिलासपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने जशपुर की रहने वाली महिला और रायपुर के निवासी युवक के मामले में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो उन पीड़ित पतियों के लिए बड़ी राहत है जिन्हें पत्नियों की बेवफाई के बाद भी कानूनी मजबूरियों के कारण हर महीने मेंटेनेंस देना पड़ता था.
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शादी के 8 महीने बाद ही अलगाव, पत्नी ने लगाए थे प्रताड़ना के गंभीर आरोप
यह पूरा मामला वर्ष 2018 से शुरू हुआ था, जिसकी पृष्ठभूमि और अदालती कार्यवाही का विवरण इस प्रकार है:
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धूमधाम से हुई थी शादी: दोनों पक्षों का विवाह 19 अप्रैल 2018 को पूरे हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था। लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और महज 8 महीने के भीतर ही दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए।
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तालाब में कूदकर खुदकुशी की कोशिश का दावा: अलग होने के बाद पत्नी ने रायपुर फैमिली कोर्ट में प्रताड़ना और 3 लाख रुपये दहेज मांगने का आरोप लगाते हुए भारी-भरकम गुजारे भत्ते की मांग की। महिला ने दावा किया था कि उसका पति उसके चरित्र पर शक करता था और मोबाइल पर बात करने पर प्रताड़ित करता था, जिससे तंग आकर उसने गांव के तालाब में कूदकर जान देने की कोशिश की थी, जिसे ग्रामीणों ने बचाया था।
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जब पति ने खोला अफेयर का राज, तो पत्नी ने लिया AI का सहारा
इस कानूनी लड़ाई में असली मोड़ तब आया जब पति ने अदालत के सामने अपनी पत्नी के अवैध संबंधों और बेवफाई से जुड़े पुख्ता डिजिटल सबूत (ऑडियो रिकॉर्डिंग और बातचीत के लिखित ट्रांसक्रिप्ट) पेश कर दिए। इन सबूतों से घिरी पत्नी ने अदालत में एक बेहद आधुनिक और चौंकाने वाला पैंतरा चला।
पत्नी का दावा- पति ने बनाई नकली आवाज: महिला के वकील ने दलील दी कि रायपुर फैमिली कोर्ट ने जिन ऑडियो रिकॉर्डिंग को आधार बनाया है, वे पूरी तरह फर्जी हैं। महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का इस्तेमाल करके उसकी हूबहू नकली आवाज तैयार की है और डिजिटल साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ की है।
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वैज्ञानिक जांच में खुली पोल, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर इन डिजिटल साक्ष्यों की बाकायदा लैबोरेट्री में वैज्ञानिक जांच कराई गई। वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट में यह साबित हो गया कि ऑडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह असली थी और महिला का एआई (AI) द्वारा नकली आवाज बनाने का दावा पूरी तरह झूठा था।
निचली अदालत के रिकॉर्ड्स और वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट को खंगालने के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने साफ कहा कि रायपुर फैमिली कोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है और पत्नी के खिलाफ व्यभिचार के सबूत बिल्कुल पुख्ता हैं। कानून का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्नी अपनी मर्जी से किसी अन्य मर्द के साथ संबंध में रह रही है, तो वह पति से किसी भी तरह के भरण-पोषण की हकदार नहीं रह जाती। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने महिला की पुनर्विचार याचिका को सिरे से खारिज कर दिया और पीड़ित पति को इस कानूनी प्रताड़ना से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई।

