गणतंत्र दिवस 2026: अशोक चक्र से शुभांशु शुक्ला सम्मानित, 70 जांबाज़ों को वीरता पुरस्कार
छत्तीसगढ़ के लिए यह क्षण अत्यंत गौरव और सम्मान से भरा है। बस्तर अंचल की समाजसेविका और स्नेह-ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात बुधरी ताटी जी, साथ ही जनजातीय क्षेत्रों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी एवं सुनीता गोडबोले जी का पद्मश्री सम्मान के लिए चयन पूरे प्रदेश के लिए अपार गर्व का विषय है।
पद्म से परम विशिष्ट सेवा तक: गणतंत्र दिवस 2026 पर देश के शूरवीरों और विभूतियों को सम्मान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इन तीनों विभूतियों ने अपने सेवा कार्यों से न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। उनका जीवन सच्ची सेवा, समर्पण और मानवता का अनुपम उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में वर्षों से समाज सेवा में जुटी बुधरी ताटी जी ने मानवता, स्नेह और ममता की जो मिसाल पेश की है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान, बच्चों, महिलाओं और जरूरतमंदों की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। बस्तर में उन्हें ‘बड़ी दीदी’ कहकर सम्मान और स्नेह से पुकारा जाना उनके सेवा कार्यों की व्यापक स्वीकार्यता का प्रतीक है।
इसी प्रकार डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी और सुनीता गोडबोले जी ने जनजातीय अंचलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निःस्वार्थ भाव से कार्य करते हुए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में रहकर उन्होंने आदिवासी समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन तीनों विभूतियों का पद्मश्री सम्मान के लिए चयन यह प्रमाणित करता है कि सच्ची सेवा और मानवता की भावना को देश सर्वोच्च सम्मान देकर नमन करता है। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से सभी चयनित विभूतियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सेवा कार्यों की कामना की।
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