छेरछेरा का दूसरा पहलू आध्यात्मिक भी है, यह बड़े-छोटे के भेदभाव और अहंकार की भावना को समाप्त करता है. फसल के घर आने की खुशी में पौष मास की पूर्णिमा को छेरछेरा पुन्नी तिहार मनाया जाता है. इसी दिन मां शाकम्भरी जयंती भी मनाई जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं. पौष पूर्णिमा धान के लिए प्रसिद्ध है. संपूर्ण भारतवर्ष में इस शुभदिन अन्न, दलहन-तिलहन का दान करना बेहद शुभ माना जाता है. यह सूर्य के उत्तरायण की प्रथम पूर्णिमा है. अत: इसका विशेष महत्व माना गया है.

शाकंभरी माता की जयंती
शाकम्भरी माता देवी भगवती का अवतार है. ऐसा माना जाता है कि देवी भगवती ने पृथ्वी पर अकाल और गंभीर खाद्य संकट को कम करने के लिए शाकम्भरी मां का अवतार लिया था. इन्हें सब्जियों, फलों और हरी पत्तियों की देवी के रूप में भी जाना जाता है. शाकम्भरी नवरात्रि की पूर्णिमा का महत्व अत्याधिक है. इस दिन को पौष पूर्णिमा के नाम से देश के विभिन्न स्थानों पर मनाया जाता है. इस दिन लोग पवित्र नदी पर जाकर स्नान करते हैं. ऐसा करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है. साथ ही व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version