जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में कांसाबेल तहसील के टांगरगांव में प्रस्तावित 899 करोड़ रुपये का वृहद इस्पात संयंत्र आखिरकार पूरी तरह रद्द कर दिया गया है। मां कुदरगढ़ी एनर्जी एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देकर शासन से एमओयू (MoU) निरस्त करने का आग्रह किया था, जिसे राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड ने स्वीकार कर लिया। बुधवार को इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा निरस्तीकरण आदेश की सत्यापित प्रति सौंपे जाने के बाद पिछले कई वर्षों से आंदोलनरत ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठे ग्रामीण, आदेश की कॉपी मिलने पर खत्म हुआ आंदोलन
टांगरगांव सहित आसपास के पांच गांवों के 200 से अधिक ग्रामीण (बड़ी संख्या में महिलाओं सहित) बुधवार को ट्रैक्टर और निजी वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। प्रस्तावित जमीन पर हाल ही में कुछ निर्माण गतिविधियां दिखने के बाद ग्रामीणों में यह आशंका फैल गई थी कि संयंत्र स्थापना का काम चोरी-छिपे शुरू किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना शुरू कर दिया और निरस्तीकरण आदेश की आधिकारिक प्रति की मांग पर अड़ गए। स्थिति को देखते हुए कोतवाली प्रभारी मोरध्वज देशमुख के नेतृत्व में भारी पुलिस बल तैनात कर गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद एसडीएम व्ही.आर. मस्के की मध्यस्थता से ग्रामीणों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर रोहित व्यास से मुलाकात की। उद्योग विभाग द्वारा राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का निरस्तीकरण आदेश सौंपे जाने के बाद ग्रामीण शांत हुए और धरना समाप्त किया।
2021 से चल रहा था विरोध का लंबा दौर
इस परियोजना की नींव 12 जुलाई 2021 को तत्कालीन सरकार और कंपनी के बीच हुए एमओयू से पड़ी थी। इसके बाद जब पर्यावरण संरक्षण मंडल ने संयंत्र स्थापना की प्रदूषण अनुमति के लिए जनसुनवाई का नोटिस जारी किया, तो आदिवासी संगठन और स्थानीय ग्रामीण लामबंद हो गए।
आंदोलन के दौरान क्षेत्र में कई बार चक्काजाम, रैलियां और कलेक्ट्रेट घेराव की घटनाएं हुईं। तत्कालीन विपक्षी दल भाजपा और जनजातीय सुरक्षा मंच ने भी ग्रामीणों की जल, जंगल और जमीन की चिंताओं का समर्थन किया था। कड़े जनविरोध के चलते यह परियोजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई थी।
क्या था 899 करोड़ का यह प्रोजेक्ट?
एमओयू के तहत टांगरगांव में भारी औद्योगिक इकाई लगाने की योजना थी, जिसमें निम्नलिखित इकाइयां शामिल थीं:
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स्पंज आयरन प्लांट और कैप्टिव पावर प्लांट
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स्टील मेल्टिंग शॉप (SMS) और स्टील रोलिंग मिल
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सोलर पावर प्लांट
कंपनी द्वारा हाथ पीछे खींचने और राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की औपचारिक मुहर लगने के बाद अब यह पूरा 899 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है।



