इक्रीसेट (ICRISAT) के साथ 5 साल का एमओयू, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
रायपुर: छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए राज्य सरकार फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और व्यापवर्तन पर एक महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। बुधवार को मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य के मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के वैज्ञानिकों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई।
मुख्य सचिव ने कृषि वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि वे सीधे किसानों के खेतों में जाकर जमीनी मुआयना करें और उन्हें अधिक बाजार मूल्य देने वाली उच्च गुणवत्ता वाली फसलों की खेती के लिए प्रेरित करें, ताकि अन्नदाताओं की आमदनी में ठोस इजाफा हो सके।
ओडिशा मॉडल की तर्ज पर 5 साल का रोडमैप
बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि यह परियोजना ओडिशा में पहले से ही सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है, जिसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इसे छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जा रहा है।
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5 वर्षीय कार्ययोजना: प्रोजेक्ट के दीर्घकालिक और स्थायी परिणाम सुनिश्चित करने के लिए इसे आगामी 5 वर्षों के लिए प्रस्तावित किया गया है।
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क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण: परियोजना को राज्यभर में क्लस्टर आधारित (Cluster-based) और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
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तत्काल बेसलाइन सर्वे: आगामी फसल मौसम से ही जमीनी स्तर पर ट्रायल और प्रयोग शुरू करने के लिए कृषि विभाग तुरंत एक विस्तृत बेसलाइन सर्वे कराएगा।
राज्य सरकार और इक्रीसेट के बीच होगा जेनेरिक एमओयू
छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास, किसान कल्याण एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग और हैदराबाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय संस्थान ‘इक्रीसेट’ के बीच जल्द ही एक जेनेरिक समझौता (MoU) हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस एमओयू के प्रारूप निर्धारण में राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (समेति) की भी सक्रिय सहभागिता रहेगी।
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क्षमता विकास और तकनीकी सहयोग: इक्रीसेट के वैज्ञानिक मैदानी कृषि अमले और किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, जलवायु-अनुकूल बीजों और पुनरुत्थानशील कृषि (Regenerative Agriculture) का व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे।
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मजबूत मार्केट लिंकेज: किसानों द्वारा उत्पादित वैकल्पिक और मूल्यवान फसलों के विपणन व उचित मूल्य पर बिक्री के लिए एक सुदृढ़ मार्केट लिंकेज सिस्टम विकसित किया जाएगा।
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योजनाओं का अभिसरण (कन्वर्जेंस): केंद्र और राज्य सरकार की अन्य कृषि व ग्रामीण विकास योजनाओं के बजट और संसाधनों को इस परियोजना से जोड़ा जाएगा।
उच्च स्तरीय बैठक में विशेषज्ञ रहे मौजूद
बैठक के दौरान इक्रीसेट के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गाैनकर ने इस पायलट प्रोजेक्ट का विस्तृत खाका और प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय संस्थान से डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी एवं डॉ. सी.एल. जैन शामिल रहे। वहीं, राज्य कृषि विभाग की ओर से संचालक (समेति) बी. के. बिजरोनिया तथा उप संचालक कृषि उमेश सिंह तोमर विशेष रूप से उपस्थित रहे।



