सरकार ने दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की अपनी मुहिम में बड़ी सफलता हासिल की है। डिजिटल भारत निधि (पूर्ववर्ती सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष) के माध्यम से उन इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई जा रही है जो अब तक तकनीक की पहुंच से काफी दूर थे। दूरसंचार विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतनेट परियोजना के तहत फरवरी 2026 तक देश की लगभग 2,17,805 ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड सेवा के लिए तैयार कर लिया गया है। सरकार ने ‘संशोधित भारतनेट कार्यक्रम’ को लागू किया है, जिसका उद्देश्य नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और उन गांवों तक भी कनेक्टिविटी पहुंचाना है जो ग्राम पंचायत स्तर पर नहीं आते, लेकिन उन्हें इंटरनेट की आवश्यकता है।
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मोबाइल नेटवर्क के मामले में भी सरकार ने अभूतपूर्व प्रगति की है। ‘4जी सैचुरेशन’ परियोजना के तहत फरवरी 2026 तक उन दूरस्थ क्षेत्रों में 24,263 मोबाइल टावर चालू किए जा चुके हैं जहां पहले कोई नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। द्वीपीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की चुनौती को हल करने के लिए सरकार ने समुद्र के भीतर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का ऐतिहासिक कार्य भी पूरा किया है। चेन्नई और अंडमान-निकोबार के बीच और कोच्चि और लक्षद्वीप के बीच पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल ने वहां 4जी/5जी और हाई-स्पीड डेटा सेवाओं को सुलभ बना दिया है, जिससे वहां के निवासियों को मुख्य भूमि जैसी डिजिटल सुविधाएं मिल रही हैं।
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डिजिटल क्रांति को समावेशी बनाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, सीडीएसी और डिजिटल इंडिया निगम के साथ मिलकर ऐसे आईटी-आधारित समाधान तैयार किए हैं जो बेहद सरल हैं। इन डिजिटल गवर्नेंस समाधानों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें ‘ऑफलाइन क्षमताओं’ के साथ विकसित किया गया है। यह उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रहा है जहां इंटरनेट की उपलब्धता अभी भी सीमित है। इसके अलावा, ये मंच दिव्यांग-अनुकूल हैं और इनमें बहुभाषी सुविधाएं भी दी गई हैं, ताकि भाषा की बाधा न रहे। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इन डिजिटल समाधानों के जरिए अंतिम छोर तक सरकारी सेवाएं पहुंचाना अब आसान हो गया है, चाहे गांव कितना भी दूरस्थ क्यों न हो।
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