विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आदिम जाति विकास विभाग (आदिवासी विभाग) के अंतर्गत मंडल संयोजक (Mandal Sanyojak) के पदों पर भर्ती प्रक्रिया के रुकने और इन पदों पर शिक्षकों को प्रभार दिए जाने का मामला गूंजा है। विधायक श्री देवेंद्र यादव द्वारा पूछे गए ध्यानाकर्षण प्रश्न का लिखित जवाब देते हुए प्रदेश के आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने भर्ती निरस्त होने की वजह और वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था का पूरा विवरण सदन के पटल पर रखा।
मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में जारी की गई भर्ती प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया गया था।
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अपरिहार्य कारणों से निरस्त हुआ था वर्ष 2023 का विज्ञापन
सदन में विधायक श्री देवेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि क्या वर्ष 2023 में आदिवासी विभाग द्वारा मंडल संयोजक पद हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, और यदि हाँ तो इसकी भर्ती प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं की जा रही है? इस सवाल पर आदिम जाति विकास मंत्री ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि वर्ष 2023 में मंडल संयोजक पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि, उन्होंने आगे बताया कि उक्त विज्ञापन को अपरिहार्य कारणों से निरस्त कर दिया गया था, जिसके चलते यह भर्ती प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जा सकी।
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नियमित नियुक्ति नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था के तहत शिक्षकों को मिला काम
सदन में मंडल संयोजक के पदों पर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई:मंत्री ने साफ किया कि शिक्षकों को मंडल संयोजक के पदों के विरुद्ध कोई स्थायी या नियमित नियुक्ति नहीं दी गई है। विभाग में मंडल संयोजक के पद रिक्त होने के कारण केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से यह कार्य संभालने का आदेश दिया गया है। विधायक द्वारा शिक्षकों को स्कूलों में युक्तियुक्तकरण के माध्यम से पदस्थ न करने पर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने जवाब दिया कि चूंकि इन शिक्षकों को प्रशासनिक तौर पर मंडल संयोजक का कार्य संपादन करने हेतु आदेशित किया गया है, इसी वजह से उन्हें युक्तियुक्तकरण के माध्यम से विद्यालयों में पदस्थ नहीं किया गया है।
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स्टाफ की किल्लत: अनापत्ति (NOC) मिलने के बाद ही सौंपा प्रभार
शिक्षकों को मंडल संयोजक का प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया और शासन के निर्देशों को लेकर पूछे गए अंतिम सवाल पर मंत्री ने वास्तविक परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत जिलों में छात्रावास अधीक्षक एवं लिपिक संवर्गीय (Clerical Staff) कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है।
इसी स्टाफ की कमी (किल्लत) को देखते हुए, स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों को उनके मूल विभाग से बकायदा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किए जाने के उपरांत ही अस्थायी रूप से मंडल संयोजक का प्रभार सौंपा गया है, ताकि शासकीय कार्य प्रभावित न हों।



