विशेष संवाददाता, जशपुर |
छत्तीसगढ़ के प्रमुख फल उत्पादक जिले जशपुर में इस बार प्रकृति का अनोखा मिजाज देखने को मिल रहा है। जिस ‘मधुमास’ (फाल्गुन-चैत्र) का इंतजार आम के बागान फरवरी के अंत तक करते थे, वह इस बार जनवरी की गुलाबी ठंड में ही दस्तक दे चुका है। जिले के कई क्षेत्रों में आम के पेड़ों पर बौर (मंजर) लद गए हैं, जिससे किसानों के चेहरे पर जहाँ चमक आई है, वहीं फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।
आमतौर पर आम के पेड़ों में फूल आने की प्रक्रिया फरवरी के बाद शुरू होती है, लेकिन इस साल जनवरी में ही बगीचा, कुनकुरी, मनोरा और दुलदुला के बागान महकने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार कड़ाके की ठंड का अभाव और दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी ने पेड़ों में ‘अर्ली फ्लोरिंग’ (समय से पूर्व पुष्पन) को प्रेरित किया है।
जशपुर का वातावरण आम की खेती के लिए वरदान माना जाता है। इस समय जिले की इन प्रमुख किस्मों में बौर देखा जा रहा है दशहरी और लंगड़ा यहाँ का काफ़ी प्रसिद्ध है वहीँ कहीं कहीं व्यावसायिक किस्में आम्रपाली, मालदा, सुंदरी, चौसा और बंगनपल्ली के पेड़ों में भी मंजर निकलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
समय से पहले बौर आना जहाँ अच्छी फसल की उम्मीद जगाता है, वहीं यह कई जोखिम भी पैदा करता है। उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों को ‘सतर्क रहने’ की सलाह दी है:
यदि अचानक तापमान गिरा या घना कोहरा छाया, तो कच्चा बौर काला होकर गिर सकता है।
समय से पहले आए बौर पर ‘मधुवा’ कीट और ‘पाउडरी मिल्ड्यू’ (फफूंद) लगने की संभावना अधिक रहती है।
सिंचाई प्रबंधन: विशेषज्ञों ने इस समय अधिक सिंचाई न करने की सलाह दी है, क्योंकि इससे बौर झड़ने का खतरा रहता है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय बाद जनवरी में इतनी भारी मात्रा में मंजर देखा है। किसानों के अनुसार, “यदि अगले 15-20 दिनों तक मौसम स्थिर रहा और असमय बारिश नहीं हुई, तो इस साल आम का उत्पादन पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।”
उद्यानिकी विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपने बागानों की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार के कीट हमले की स्थिति में तुरंत विशेषज्ञों से परामर्श लेकर ही कीटनाशकों का छिड़काव करें।

