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जशपुर।
जिले के फरसाबहार विकासखंड में चल रही धान खरीदी व्यवस्था इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। टोकन नहीं कटने, वजन में भारी गड़बड़ी और पर्ची के नाम पर अवैध वसूली को लेकर गंझहियाडीह, सरईटोली सहित दर्जनों उपार्जन केंद्रों पर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। हालात ऐसे बन गए कि सैकड़ों किसान सुबह से धान से भरे ट्रैक्टरों के साथ मंडी परिसरों के बाहर बैठे रहे, लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद उन्हें न तो टोकन मिल सका और न ही खरीदी प्रक्रिया शुरू हो पाई।

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टोकन संकट ने बढ़ाई परेशानी
किसानों का कहना है कि समय पर पंजीयन कराने के बावजूद बड़ी संख्या में किसानों का पहला टोकन तक नहीं कट पाया। इसके कारण धान लदी गाड़ियां मंडी के बाहर खड़ी हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त परिवहन खर्च, मजदूरी और समय का नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई किसानों ने बताया कि वे सुबह से शाम तक मंडी परिसर में बैठे रहते हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे किसानों में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

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वजन में मनमानी, तय मानक से अधिक धान लेने का आरोप

गंझहियाडीह एवं कोनपारा उपार्जन केंद्रों पर तौल प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। किसानों के अनुसार शासन द्वारा निर्धारित 40.680 किलोग्राम प्रति बोरी के स्थान पर 40.900 से 41.500 किलोग्राम तक धान लिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि हर बोरी पर अतिरिक्त धान लेने से उन्हें सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है। आपत्ति करने पर खरीदी कर्मियों द्वारा अनदेखी किए जाने और तौल प्रक्रिया में पारदर्शिता न होने के आरोप भी लगाए गए हैं।

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किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि मंडी में धान से भरे ट्रैक्टर को प्रवेश देने से पहले पर्ची काटने के नाम पर 100 से 200 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। किसानों का कहना है कि बिना भुगतान किए ट्रैक्टर को आगे नहीं बढ़ने दिया जाता, जिससे वे मजबूरी में राशि देने को विवश हैं। इस कथित वसूली ने किसानों के आक्रोश को और भड़का दिया है।

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मामले की जानकारी मिलते ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष यूड़ी मिंज मौके पर पहुंचे और किसानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने गंझहियाडीह एवं सरईटोली उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण कर प्रशासन को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।

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इस दौरान यूड़ी मिंज ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा—“जब मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही उपार्जन केंद्रों का हाल बेहाल है, तो बाकी क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो किसान धरना-प्रदर्शन और सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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एसडीएम फरसाबहार ओमकारेश्वर सिंह ने बताया कि टोकन कटने में तकनीकी एवं व्यवस्थागत समस्याएं आई हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व, आरईएस, जल संसाधन सहित अन्य विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को लगाकर युद्धस्तर पर टोकन काटने की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन का दावा है कि दो दिनों के भीतर किसानों की समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा।

प्रशासन के अनुसार 28 जनवरी 2026 से उपार्जन केंद्रों के सत्यापन के बाद संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर उनकी निगरानी में धान खरीदी कराई जा रही है।

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निरीक्षण एवं किसानों से संवाद के दौरान कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष मनोज सागर यादव, नवीना पैकरा, मोनू जैन, पूरन वर्मा (कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष), संतोष ‘पिंटू’ यादव, पिंटू खान, त्रिलोचन यादव (कांग्रेस किसान नेता) सहित बड़ी संख्या में किसान एवं स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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धान खरीदी को लेकर उपजी यह स्थिति अब किसानों के धैर्य की सीमा पर पहुंच चुकी है। यदि टोकन, वजन और अवैध वसूली से जुड़े आरोपों पर ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जशपुर जिले में किसान आंदोलन के और तेज होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

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