रायपुर 28 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब केवल भ्रमण का माध्यम नहीं रहा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक मजबूत इंजन बन चुका है। बीते दो वर्षों में पर्यटन संस्कृति और पुरातत्त्व के क्षेत्र में किए गए ठोस प्रयासों से छत्तीसगढ़ ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह बात छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ रोहित यादव ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

प्रेस वार्ता में डॉ रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं संस्कृति व पुरातत्त्व के संचालक श्री विवेक आचार्य ने विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर आर्थिक विकास सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन को एक साथ आगे बढ़ाने का मॉडल तैयार किया है।

डॉ रोहित यादव ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद निजी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया गया है जिससे होटल रिसॉर्ट साहसिक पर्यटन और आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विकास हुआ है। रामलला दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से वर्ष 2024 25 में 42 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों के माध्यम से अयोध्या दर्शन कराया गया जिससे धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली।

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने होम स्टे नीति 2025 30 लागू की है। इसके अंतर्गत 500 नए होम स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस नीति के माध्यम से पूंजी निवेश सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

पर्यटन सचिव ने बताया कि 350 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर की परियोजना को मंजूरी मिली है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी का भूमि पूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा किया गया। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

संस्कृति एवं पुरातत्त्व संचालक श्री विवेक आचार्य ने बताया कि भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना स्वदेश दर्शन योजना 2 0 के तहत लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनाई जा रही है जिससे हजार वर्ष पुरानी इस धरोहर का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने जशपुर जिले के मयाली बगीचा पर्यटन सर्किट के अंतर्गत तीन प्रमुख स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। वहीं सिरपुर को विश्व विरासत स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

चित्रकोट को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट परियोजना प्रस्तावित है जिसके लिए भारत सरकार से 250 करोड़ रुपये की फंडिंग की अपेक्षा की जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से चित्रकोट को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन गंतव्य बनाने की तैयारी है।

पर्यटन विभाग ने छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का प्रचार देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंचाया है। स्पेन थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आयोजनों में भाग लेकर छत्तीसगढ़ को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया। फिक्की और यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी से राज्य की पर्यटन ब्रांडिंग को मजबूती मिली है।

राज्य में पर्यटन से जुड़े व्यवसायों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2024 में केवल 30 टूर ऑपरेटर पंजीकृत थे वहीं अब यह संख्या 300 से अधिक हो चुकी है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है जो वित्त वर्ष 2025 26 में बढ़कर 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

संस्कृति विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हुए श्री विवेक आचार्य ने बताया कि चिन्हारी पोर्टल के माध्यम से कलाकारों और साहित्यकारों को पंजीकृत कर उन्हें पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। कलाकार कल्याण कोष योजना के तहत जरूरतमंद कलाकारों और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 9 फरवरी तक किया जा रहा है जिससे जनजातीय संस्कृति लोकनृत्य लोकगीत हस्तशिल्प पारंपरिक व्यंजन और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

पुरातत्त्व क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि सामने आई है। रायपुर के समीप रीवांगढ़ में किए गए उत्खनन से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी। यह खोज छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास को नई दृष्टि से समझने का आधार बनेगी।

आने वाले समय में भारत भवन विविध कला केंद्र राज्य अभिलेखागार राजकीय मानव संग्रहालय और स्वामी विवेकानंद स्मारक संग्रहालय की स्थापना की भी योजना है। अधिकारियों ने कहा कि पर्यटन संस्कृति और पुरातत्त्व के समन्वित विकास से छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक समृद्धि की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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