काठमांडू: तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंप और उसके बाद हुए भीषण हिमस्खलन के कारण भोटे कोशी और ल्हेंडे नदी में आई अचानक बाढ़ ने मध्य नेपाल में भयंकर तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 157 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय तीर्थयात्री और दर्जनों सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
बिना किसी पूर्व चेतावनी के पानी की विशाल दीवार के रूप में आई इस बाढ़ ने रसुवा के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नुवाकोट के कई रिहायशी इलाकों को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है।
उपग्रह तस्वीरों और आधिकारिक जांच के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के झटकों से ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन होने से नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया था, जिससे यह जलप्रलय उत्पन्न हुई। इस विनाशकारी बाढ़ में 19 प्रमुख पुल, 40 किलोमीटर लंबी सड़कें, 9 वाणिज्यिक बैंक और करीब 12 जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह बह गईं या नष्ट हो गईं। अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सीमा पार वास्तविक समय पूर्व चेतावनी प्रणाली के अभाव को जान-माल के भारी नुकसान का मुख्य कारण बताया है।
आपदा के बाद सेना और बचाव दल हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में राहत अभियान चला रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड क्रॉस ने 12 लाख डॉलर की आपात सहायता जारी की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी सहित वैश्विक नेताओं ने इस त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने का आश्वासन दिया है।

