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रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के जुलाई सत्र के दौरान आज पांचवीं अनुसूची क्षेत्र (आदिवासी बहुल क्षेत्रों) में शराब निर्माण और बिक्री को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। वाणिज्यिक कर आबकारी विभाग के अंतर्गत विधायक श्री जनक ध्रुव द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न का जवाब देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने प्रदेश के पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में संचालित शराब दुकानों, निर्माण शालाओं और ग्राम सभा की अनुमति से जुड़े नियमों की पूरी स्थिति सदन के सामने साफ की है।

आइए जानते हैं कि सदन में पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में मादक द्रव्यों के निर्माण और बिक्री को लेकर क्या जानकारी सामने आए हैं।

सबसे पहले अगर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में संचालित कुल शराब दुकानों और मद्यशाला की बात करें तो मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि राज्य के पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में मादक द्रव्यों के विनिर्माण के लिए 01 मद्यशाला स्थापित है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में मादक द्रव्यों के विक्रय के लिए कुल 179 निकास यानी शराब दुकानें संचालित हैं। इसकी पूरी जिलेवार जानकारी भी संलग्न प्रपत्र के रूप में दी गई है।

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इसके बाद इन दुकानों और निर्माण शाला के लिए ग्राम सभा से ली गई अनुमति को लेकर मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। विधायक ने सवाल किया था कि मादक द्रव्यों के विनिर्माण के लिए शाला स्थापित करने से पूर्व तथा विक्रय के लिए निकास शुरू करने से पूर्व कितने प्रकरणों में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा के अनुसार ग्राम सभा की सहमति या अनुज्ञा ली गई थी। इस पर मंत्री ने बताया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रांतर्गत स्थापित की गई 01 मद्यशाला के लिए ग्राम सभा की अनुमति ली गई थी। वहीं प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्रों में संचालित कुल 179 मदिरा दुकानों में से 120 मदिरा दुकानें शहरी क्षेत्र में स्थापित हैं, जिनके लिए नियमानुसार ग्राम सभा की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।

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अंत में ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दुकानों और नए नियम को लेकर भी सरकार का रुख सामने आया। मंत्री ने बताया कि कुल 179 मदिरा दुकानों में से शेष 59 मदिरा दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैं। छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 61-ड (2) के अनुसार ग्राम सभा की क्षेत्रीय अधिकारिता के भीतर समाविष्ट किसी क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा ग्राम सभा की सहमति या अनुज्ञा के बिना किसी मादक द्रव्य के विनिर्माण के लिए कोई नई विनिर्माण शाला स्थापित नहीं की जाएगी और मादक द्रव्यों के विक्रय के लिए कोई नया निकास नहीं खोला जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उक्त नियमानुसार ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थापित 59 मदिरा दुकानों का संचालन किया जा रहा है और बिना अनुमति के दुकान संचालित होने से जुड़ी अन्य सभी जानकारियां निरंक हैं।

विधानसभा में सामने आई इस जानकारी से यह स्पष्ट हो गया है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आबकारी विभाग नियमों के तहत ही मद्यशाला और मदिरा दुकानों का संचालन कर रहा है।

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