रायपुर/27 अप्रैल 2026। राजधानी रायपुर के आरंग ब्लॉक अंतर्गत महानदी के चिखली घाट और समोदा घाट से निजी उद्योग अडानी पावर द्वारा पानी की पाइप लाइन बिछाने किसानों की निजी जमीनों और उपजाऊ खेतों को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस गूंगी बहरी सरकार में मोदी के मित्र अडानी का अत्याचार चरम पर है। एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी? महानदी का पानी रायखेड़ा में संचालित अडानी पॉवर प्लांट लाने के लिए किसानो के निजी जमीन, उपजाऊ खेतों में जबरिया खुदाई की जा रही है। मेढ़-पार और हरे भरे पेड़ बेरहमी से काटे जा रहे हैं, अपना खेत पहचानना मुश्किल हो गया है। बिना सूचना दिए, बगैर सहमति 10 फिट गहरा और 10 फिट चौड़ा गढ्ढा खोद कर पाइपलाइन बिछाया जा रहा है। उक्त पाइपलाइन के दोनों तरफ 20- 20 फिट तक की भूमि पर भविष्य में निर्माण प्रतिबंधित रहेगा, कुआं, नलकूप खोदे में भी प्रतिबंध, पेड़ तक लगाने में प्रतिबंध है, यह जानकारी भी किसानों को नहीं दे रहे। फिलिंग के बाद भी 3-4 साल तक खेत के उस भाग में न ट्रैक्टर जा पाएगा न हार्वेस्टर। खेती-किसानी बर्बाद करने पर तुली है कॉर्पाेरेट की गुलाम यह अत्याचारी सरकार।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि खेत नहीं, ये अन्नदाता किसानों का अस्तित्व है, जहां खुदाई हो रही है वह कन्हार मिट्टी और नहर अपासी खेत है, जो खेत सोना उगलती है, उसे एक उद्योगपति के निजी स्वार्थ के लिए बर्बाद करना अन्याय है। यह केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, सैकड़ों किसानों के पुरखों की निशानी है। जो सरकार किसानों की निजी जमीनों और खेतों को अपने धन्नासेठ पूंजीपतियों की जागीर समझते हैं, वे भूल रहे हैं कि किसान अपनी आजीविका और सम्मान के लिए मर मिटना भी जानता है। किसानों का अपमान, और केवल कॉर्पोरेट का उत्थान यह नीति देश और प्रदेश को विनाश की ओर ले जा रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूरे मामले में प्रशासन और सरकार में बैठे नेता मंत्री मौन है, उल्टे ठेकेदार के गुर्गे किसानों को विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं, प्रशासन के रवैए से प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ में सरकार से ऊपर अडानी है, भाजपा सरकार में किसानों की सुनवाई कहीं नहीं है, किसानों के हक और अधिकार सरेआम कुचले जा रहे हैं। न भूमि अधिग्रहण कानून, न पाइपलाइन अधिनियम 2004 की प्रक्रिया का पालन हो रहा है, न उचित मुआवजा बल्कि उद्योगपतियों के दबंगई और दादागिरी से पीड़ित किसान ही प्रताड़ित हो रहे हैं। सरकार उद्योगों की मनमानी और किसानों पर हो रहे इस अत्याचार पर तत्काल रोक लगाएं।



