नई दिल्ली: सरकार यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के लिए रूपरेखा तैयार कर रही है। संसद द्वारा अगस्त में पारित किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के जरिए सरकार को बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को यह शुल्क लगाने के लिए अधिकृत करने का कानूनी आधार मिल चुका है। माना जा रहा है कि अगले कुछ हफ्तों में इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है। हालांकि, सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आम उपभोक्ताओं और सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।
प्रस्तावित ढांचे के तहत यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगभग 40 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.4% की दर से MDR तय किया जा सकता है। इस राजस्व का सबसे बड़ा 40% हिस्सा (लगभग 16 बेसिस पॉइंट्स) जारीकर्ता बैंक (इश्यूइंग बैंक) के पास जाएगा। वहीं, PhonePe और Google Pay जैसे थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स और एक्वायरिंग बैंकों को 30-30% (लगभग 12-12 बेसिस पॉइंट्स प्रत्येक) का हिस्सा मिलेगा। इस पूरी प्रक्रिया और नियमों को अंतिम रूप देने का जिम्मा फिलहाल नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के पास है।
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शुरुआती योजना के मुताबिक यह चार्ज मुख्य रूप से 1 से 1.5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर वाले मर्चेंट्स और 72,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न सेक्टरों के कारोबारियों के लिए शुल्क की दरें अलग-अलग हो सकती हैं। अगस्त में हुए कुल 24.51 बिलियन यूपीआई ट्रांजैक्शन में से 15.51 बिलियन यानी 63% भुगतान पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) श्रेणी के थे, जिनका कुल मूल्य 8.95 लाख करोड़ रुपये और औसत ट्रांजैक्शन साइज करीब 577 रुपये दर्ज किया गया।
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