रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार श्रमिक परिवारों के होनहार बच्चों को देश और राज्य के बेहतरीन निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाई के सर्वोत्कृष्ट अवसर देकर उनके सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
इस कल्याणकारी योजना के तहत चयनित होने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को राज्य के प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों (Private Residential Schools) में कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक मुफ्त अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी।
फीस से लेकर हॉस्टल और भोजन तक का पूरा खर्च उठाएगी सरकार
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें चयनित छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार खुद उठाएगी। विद्यार्थियों की स्कूल फीस, हॉस्टल का खर्च, पौष्टिक भोजन, गणवेश (यूनिफॉर्म), किताबें व लेखन सामग्री (स्टेशनरी) सहित अन्य सभी आवश्यक खर्चों का पूरा भुगतान ‘छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ द्वारा किया जाएगा। इससे गरीब श्रमिक परिवारों को अपने बच्चों की महंगी पढ़ाई के भारी-भरकम आर्थिक बोझ से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
3 जुलाई तक इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन
योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र और श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 3 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
पात्रता रखने वाले इच्छुक अभ्यर्थी नीचे दिए गए माध्यमों से आसानी से आवेदन कर सकते हैं:
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श्रम विभाग का आधिकारिक वेब पोर्टल: https://shramevjayate.cg.gov.in/shramik
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अपने नजदीकी जिला श्रम कार्यालय (Labour Office) में जाकर।
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किसी भी चॉइस सेंटर या लोक सेवा केंद्र (LSK) के माध्यम से।
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विभाग के आधिकारिक ‘श्रमेव जयते ऐप’ (Shramev Jayate App) के जरिए।
सरकार ने आवेदन के लिए इतने सारे विकल्प इसलिए दिए हैं ताकि दूरदराज के गांवों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति और जरूरतमंद परिवारों तक इस योजना का लाभ बिना किसी परेशानी के पहुंच सके। अधिकारियों का कहना है कि यह योजना न केवल श्रमिकों के बच्चों का शैक्षणिक विकास करेगी, बल्कि शिक्षा के माध्यम से उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।



