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रायपुर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों—बस्तर और सरगुजा संभाग—में बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने पूरी तरह कमर कस ली है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने विधायक श्री विक्रम मंडावी द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में सदन को अवगत कराया कि प्रदेश में कुपोषण की दर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुपोषण का स्तर जो वर्ष 2022-23 में 17.76 प्रतिशत था, वह वर्ष 2024-25 तक घटकर 14.31 प्रतिशत पर आ गया है।
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कुपोषण मुक्ति के लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर प्रभावी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री सुपोषण योजना’ और ‘मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना’ के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य और आहार पर ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही ‘कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के जरिए प्रदेश के बच्चों को स्वस्थ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। केंद्र सरकार की ओर से भी पूरक पोषण आहार कार्यक्रम और पोषण अभियान के जरिए आंगनबाड़ियों के माध्यम से पौष्टिक आहार और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
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आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जशपुर जिले ने इस दिशा में सराहनीय प्रगति की है, जहाँ कुपोषण की दर घटकर अब मात्र 10.37 प्रतिशत रह गई है, जो राज्य के औसत से काफी बेहतर है। हालाँकि, सुकमा और नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिलों में अब भी कुपोषण की दर राज्य के औसत से अधिक बनी हुई है। सुकमा में यह दर 34.78 प्रतिशत और नारायणपुर में 26.33 प्रतिशत दर्ज की गई है, जिसे कम करने के लिए सरकार विशेष स्वास्थ्य शिविरों और पूरक आहार के माध्यम से प्रयास तेज कर रही है।
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मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि वर्ष 2024 से फरवरी 2026 तक की अवधि में इन योजनाओं के लिए आवंटित बजट और केंद्र से प्राप्त राशि का पूरा विवरण पारदर्शी तरीके से उपयोग किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आदिवासी अंचलों के अंतिम छोर तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचे और छत्तीसगढ़ का भविष्य सुरक्षित एवं सेहतमंद बन सके।
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