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नई दिल्ली/रायपुर:
देश के ग्रामीण प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्र सरकार द्वारा लॉन्च किया गया एआई-पावर्ड प्लेटफॉर्म ‘सभासार’ अब छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों के लिए वरदान साबित हो रहा है। 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इस तकनीक ने ग्राम सभा की बैठकों के पुराने ढर्रे को बदल दिया है। अब बैठकों की कार्यवाही को हाथ से लिखने के बजाय, एआई आधारित वॉइस-टू-टेक्स्ट तकनीक के जरिए सीधे डिजिटल दस्तावेज़ में बदला जा रहा है।
छत्तीसगढ़ ने हासिल की बड़ी उपलब्धि आंकड़ों की बात करें तो छत्तीसगढ़ इस तकनीक को अपनाने में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है। प्रदेश की कुल 11,688 ग्राम पंचायतों में से 8,864 पंचायतों (75.84%) ने ‘सभासार’ टूल का उपयोग करना शुरू कर दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक को लेकर न केवल जागरूकता बढ़ी है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अब सरपंचों और पंचायत सचिवों के लिए बैठकों का विवरण (Minutes of Meeting) तैयार करना बेहद आसान और सटीक हो गया है।
भाषिणी और इंडिया-एआई का संगम यह पूरा सिस्टम भारत सरकार के ‘भाषिणी’ मॉडल पर आधारित है, जो क्षेत्रीय भाषाओं को पहचानने और उन्हें टेक्स्ट में बदलने में सक्षम है। ग्राम सभा की बैठकों के दौरान होने वाली चर्चा को मोबाइल या कैमरा जैसे सामान्य उपकरणों के माध्यम से रिकॉर्ड किया जाता है, जिसे ‘सभासार’ तुरंत लिखित रूप दे देता है। पंचायत पदाधिकारियों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अंतिम स्वीकृति देने से पहले इस लिखित ड्राफ्ट की समीक्षा कर सकें और यदि कोई सुधार आवश्यक हो, तो उसे संपादित कर सकें।
डेटा सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘सभासार’ का मुख्य उद्देश्य ग्राम सभाओं के दस्तावेजीकरण को पारदर्शी बनाना है। चूंकि ग्राम सभाएं सार्वजनिक मंच हैं, इसलिए वहां होने वाली चर्चा का सटीक रिकॉर्ड होना भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार साबित होगा। सुरक्षा के लिहाज से, सारा डेटा सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर में ही प्रोसेस किया जाता है और इसे किसी बाहरी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाता। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियमों के तहत यह सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है।

