अंबिकापुर। सरगुजा जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक मामला सामने आया है। जशपुर जिले में तैनात 39 वर्षीय पुलिस कॉन्स्टेबल देवनारायण राम की मौत के 42 दिन बाद उनके पंजीकृत मोबाइल पर आयुष्मान भारत योजना के तहत संदेश मिला: “प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप ठीक हो गए हैं और घर लौट रहे हैं।” इस संदेश ने मृतक के शोक संतप्त परिवार के जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कॉन्स्टेबल देवनारायण राम को 26 जून को आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहाँ 30 जून को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। परिजनों ने अंतिम संस्कार कर अस्पताल से मृत्यु प्रमाण पत्र भी हासिल कर लिया था। मृतक की पत्नी सीमा कुजूर (जो स्वयं स्वास्थ्य विभाग में नर्स हैं) के मोबाइल पर 6 अगस्त को संदेश आया कि उनके पति 26 जून से 6 अगस्त तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद डिस्चार्ज हो रहे हैं। सीमा कुजूर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा, “जब एक स्वास्थ्यकर्मी के परिवार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम गरीब और आदिवासियों का क्या होता होगा?” उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग का स्पष्टीकरण
मामले पर सफाई देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कार्ड के दुरुपयोग के आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। विभाग के अनुसार, मरीज केवल 5 दिन ही अस्पताल में भर्ती रहे और उनके खाते से केवल वास्तविक इलाज के 16,700 रुपये ही काटे गए हैं, जबकि शेष 4.74 लाख रुपये की राशि पूरी तरह सुरक्षित है।
गलत संदेश भेजे जाने का मुख्य कारण आयुष्मान पोर्टल पर क्लेम (Claim) बंद करने में हुई प्रशासनिक देरी को बताया गया है, जिसके चलते सिस्टम ने स्वतः ही मरीज के डिस्चार्ज होने का ऑटो-जेनरेटेड संदेश भेज दिया। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले दिहाड़ी (कलेक्टर रेट) डेटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
व्यवस्था में सुधार के लिए नोडल एजेंसी को पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने नवा रायपुर स्थित राज्य नोडल एजेंसी को पत्र लिखा है। इसमें मांग की गई है कि आयुष्मान पोर्टल पर मरीजों के डिस्चार्ज, रेफरल या मृत्यु से जुड़े ऑटो-जेनरेटेड संदेशों को भेजने से पहले जमीनी स्तर पर मरीज की वास्तविक स्थिति का सत्यापन अनिवार्य किया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह के मानसिक कष्ट से न गुजरना पड़े।

