हज नीति 2027 की घोषणा: हज कमेटी ने मांगे आवेदन, पहली बार व्यवस्थाओं में दिखेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दम
नई दिल्ली। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आगामी हज यात्रा के लिए ‘हज नीति 2027’ की आधिकारिक घोषणा कर दी है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस नई नीति को जारी करते हुए बताया कि हज कमेटी ऑफ इंडिया ने संभावित हज यात्रियों से आवेदन आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बार आवेदन करने की व्यवस्था को बेहद लचीला, सरल और सुलभ बनाया गया है। इच्छुक तीर्थयात्री हज कमेटी ऑफ इंडिया के आधिकारिक पोर्टल (hajcommittee.gov.in) के साथ-साथ ‘हज सुविधा ऐप’ के जरिए ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं।
कोटा और सीटों का गणित
नई नीति के अनुसार, हज कमेटी ऑफ इंडिया और निजी क्षेत्र (प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स) के बीच सीटों का बंटवारा 70:30 के पुराने अनुपात में ही रहने की उम्मीद है। इस फॉर्मूले के तहत हज कमेटी ऑफ इंडिया के हिस्से में 1,22,518 सीटें और निजी क्षेत्र के लिए 52,507 सीटें आएंगी। हालांकि, भारत सरकार लगातार सऊदी अरब से भारतीय कोटे को बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जो पिछले वर्ष 1,75,025 था। 18 जून 2026 को केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में हुई हज समीक्षा बैठक में पिछले अनुभवों को देखते हुए इस नई रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया है।
सऊदी सरकार ने भारत को दिया ‘लब्बैतुम पुरस्कार’
हज-2026 के दौरान भारतीय हज मिशन द्वारा की गई यात्री-केंद्रित पहलों जैसे मीना में सोफा-सह-बिस्तर, मक्का-मदीना के बीच हाई-स्पीड ट्रेन, बेहतरीन होटल आवास और 20-दिवसीय शॉर्ट हज पैकेज को काफी सराहना मिली थी। इन बेहतरीन प्रबंधों को देखते हुए सऊदी हज और उमराह मंत्रालय ने भारतीय हज मिशन को “सर्वश्रेष्ठ हज समन्वय और संचार” श्रेणी के तहत दो प्रतिष्ठित ‘लब्बैतुम पुरस्कारों’ से नवाजा है। भारत को यह सम्मान पहली बार प्राप्त हुआ है।
हज नीति 2027 के मुख्य बदलाव और नई सुविधाएं:
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हज यात्रियों की बेहतर देखभाल के लिए राज्य हज निरीक्षकों का अनुपात बढ़ा दिया गया है। अब हर 150 यात्रियों के बजाय प्रत्येक 135 तीर्थयात्रियों पर एक निरीक्षक तैनात रहेगा।
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हज-2026 की अंतिम वेटिंग लिस्ट के शीर्ष 20 प्रतिशत आवेदकों को इस बार चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, लोकप्रिय रहे शॉर्ट (लघु) हज पैकेज को इस साल भी जारी रखा जा रहा है।
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पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के यात्रियों की भारी मांग को देखते हुए इस बार कोलकाता को एक अतिरिक्त एम्बार्केशन पॉइंट (यात्रा शुरू करने का स्थान) के रूप में शामिल किया गया है।
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इस बार चिकित्सा जांच को सऊदी अरब के नए स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुरूप बेहद सख्त बनाया गया है। गंभीर या पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को यात्रा की मंजूरी नहीं मिलेगी ताकि सफर के दौरान उनकी सेहत और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
हज यात्रा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री
इस वर्ष की नीति की सबसे बड़ी खासियत हज प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल है। सरकार चरणों में एआई-आधारित ऐप्स, उड़ानों के लिए डिमांड मॉडलिंग, दस्तावेज सत्यापन और रियल-टाइम शिकायत ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने जा रही है।
इसके तहत एक ‘एआई असिस्टेंट’ (AI Assistant) भी तैयार किया गया है, जो हिंदी, उर्दू समेत प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे (24×7) आवाज और टेक्स्ट के माध्यम से यात्रियों की मदद करेगा। यह एआई टूल फॉर्म भरने, भुगतान करने, उड़ान और ठहरने की जानकारी देने के साथ-साथ आपातकालीन सहायता भी उपलब्ध कराएगा। इससे फॉर्म में होने वाली गलतियां सुधरेंगी और बुजुर्गों व पहली बार यात्रा करने वालों की बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी। भविष्य में इसे सऊदी अरब के ‘नुसुक प्लेटफॉर्म’ से भी जोड़ने की योजना है ताकि पूरी यात्रा के दौरान रियल-टाइम अपडेट मिलते रहें।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी योग्य आवेदकों से समय-सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है और एजेंसियों को पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं।


