Health Update: अगर आप या आपके किसी परिजन को कभी गंभीर संक्रमण (Severe Infection) के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि ऐसे मरीजों में ठीक होने के बाद भी दो साल तक मानसिक और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल JAMA Psychiatry में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों ने अमेरिका के 62 स्वास्थ्य संस्थानों के 10 लाख से अधिक मरीजों के इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड की जांच-पड़ताल की।
किन बीमारियों का बढ़ा खतरा?
रिसर्च के मुताबिक, गंभीर संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में एंग्जायटी (Anxiety), डिप्रेशन (Depression), साइकोसिस (Psychosis), अनिद्रा (Insomnia), याददाश्त कमजोर होना (Cognitive Impairment), डिमेंशिया (Dementia), स्ट्रोक (Stroke), दौरे (Seizures) और नसों से जुड़ी समस्याओं (Peripheral Nerve Disorders) का खतरा अधिक पाया गया।
भूलने की बीमारी के मामले सबसे ज्यादा
अध्ययन में एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) के जोखिम में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट, यानी याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में कमी, के सबसे ज्यादा अतिरिक्त मामले सामने आए। इसका मतलब है कि गंभीर संक्रमण के बाद लंबे समय तक दिमागी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक जोखिम
रिसर्च के अनुसार, गंभीर संक्रमण के बाद मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा वयस्कों में बच्चों की तुलना में अधिक देखा गया। हालांकि, बच्चों में भी संक्रमण के बाद इन समस्याओं का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
ठीक होने के बाद भी जरूरी है निगरानी
शोधकर्ताओं का कहना है कि गंभीर संक्रमण से उबरने के बाद मरीजों की नियमित स्वास्थ्य जांच और मानसिक स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी है। यदि मानसिक या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की समय रहते पहचान हो जाए, तो इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है और मरीज की स्थिति में बेहतर सुधार संभव है।
क्या संक्रमण ही इसकी वजह है?
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन सिर्फ एक संबंध (Association) दर्शाता है। यानी इससे यह साबित नहीं होता कि गंभीर संक्रमण सीधे इन बीमारियों का कारण बनता है। इसके पीछे के जैविक कारणों को समझने के लिए अभी और रिसर्च की आवश्यकता है।
गंभीर संक्रमण के बाद इन बातों का रखें ध्यान
- नियमित रूप से डॉक्टर से फॉलो-अप कराएं।
- याददाश्त, व्यवहार या नींद में बदलाव दिखे तो तुरंत जांच कराएं।
- पौष्टिक और संतुलित आहार लें।
- रोज 30 मिनट व्यायाम या पैदल चलें।
- 7–9 घंटे की अच्छी नींद लें।
- ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें।
- धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
- संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई और समय पर इलाज कराएं।


