नई दिल्ली: देश में बढ़ती गर्मी और भीषण लू (Heatwave) के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने दिल्ली सहित देश के 21 राज्यों को नोटिस जारी कर लू से प्रभावित होने वाले लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और बेघरों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। पीआईबी दिल्ली द्वारा जारी सूचना के अनुसार, आयोग ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों के अभाव में मज़दूर, बुजुर्ग, बच्चे और नवजात शिशु भीषण गर्मी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बार-बार चलने वाली लू और इसकी बढ़ती तीव्रता न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह लोगों की आजीविका और जीवन के अधिकार पर भी सीधा प्रहार है।
आयोग ने अपने पत्र में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच भारत में लू लगने के कारण 3,712 लोगों की दुखद मृत्यु हुई है। इस जनहानि को रोकने के लिए एनएचआरसी ने आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे 21 राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशानिर्देशों के अनुरूप राहत उपाय लागू करने को कहा है। आयोग ने राज्यों से वर्तमान मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के तहत उठाए गए कदमों पर विस्तृत और समेकित कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।
मानवाधिकार आयोग ने इस बात पर बल दिया है कि गर्मी के कारण केवल स्वास्थ्य ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में राज्यों को तत्काल एकीकृत और समावेशी उपाय करने की आवश्यकता है ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भीषण गर्मी के प्रकोप से बचाया जा सके। आयोग ने विशेष रूप से खुले आसमान के नीचे काम करने वाले श्रमिकों और बेघर लोगों के लिए उचित आश्रय और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

