रायपुर/भोपाल
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए एक बड़ी और सुखद राहत भरी खबर सामने आई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने पेंशनरों को मिलने वाली महंगाई राहत (DR) के संबंध में एक ऐतिहासिक प्रशासनिक निर्णय लिया है। नए फैसले के तहत अब दोनों राज्यों के बीच पारस्परिक सहमति की अनिवार्य बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद अब दोनों राज्य अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से महंगाई राहत की घोषणा करने और कार्यकारी आदेश जारी करने के लिए पूरी तरह सक्षम होंगे।
वित्त विभाग, मध्य प्रदेश द्वारा इस संबंध में बकायदा आदेश जारी कर दिया गया है। इस आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि भविष्य में महंगाई राहत (DR) घोषित करने के लिए अब किसी भी राज्य को दूसरे राज्य की सहमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। गौरतलब है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के कारण वर्षों से चली आ रही यह जटिल प्रक्रिया पेंशनरों के लिए अक्सर भारी देरी का कारण बनती थी। इस बड़े फैसले से अब पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ और त्वरित हो जाएगा।
पेंशनर्स महासंघ ने जताई खुशी, जताया आभार
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश ने इस ऐतिहासिक निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने बताया कि यह निर्णय उनके संगठन द्वारा लंबे समय से किए जा रहे जमीनी प्रयासों और संघर्षों का परिणाम है। महासंघ ने वित्त सचिव और मुख्य सचिव के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण चर्चा की थी और लगातार ज्ञापन सौंपकर इस जटिल बाध्यता को समाप्त करने की मांग उठाई थी। नामदेव ने इसे पेंशनरों के हित में उठाया गया एक बेहद सकारात्मक और बड़ा कदम बताया है।
अब केंद्र के समान 2% डीआर की उठी मांग
आपसी सहमति की बाध्यता समाप्त होने के तुरंत बाद, अब पेंशनर्स महासंघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल एक्शन की उम्मीद जताई है। प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने शासन से पुरजोर मांग की है कि केंद्र सरकार के समान ही राज्य में भी 1 जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई राहत (DR) का आदेश बिना किसी विलंब के तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में बुजुर्गों को समय पर राहत मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। महासंघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेकर राज्य के लाखों पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को बड़ी आर्थिक राहत प्रदान करेगी।
उड़ान योजना के नए चरण में बनेंगे 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड, 28,840 करोड़ रुपये का बजट मंजूरक्या था विवाद और क्यों होती थी देरी?
मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद से राज्य पुनर्गठन अधिनियम के नियमों के तहत पेंशनरों को मिलने वाली किसी भी महंगाई राहत के लिए दोनों राज्यों की सहमति अनिवार्य थी। इसके चलते जब एक राज्य फाइल आगे बढ़ाता था, तो दूसरे राज्य की मंजूरी मिलने में महीनों का समय लग जाता था और भुगतना बुजुर्ग पेंशनरों को पड़ता था। अब इस फैसले से पेंशनरों को इस दफ्तरशाही के झंझट से हमेशा के लिए आजादी मिल गई है।


