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विशेष संवाददाता | रायपुर

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज का दिन ऐतिहासिक फैसलों के नाम रहा। सदन ने जहाँ एक तरफ उद्योग और व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में पैर पसार रही प्लास्टिक की गंभीर समस्या पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एकजुटता दिखाई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पारित हुआ नया बिजनेस एक्ट छत्तीसगढ़ को देश का पहला ऐसा राज्य बनाने जा रहा है, जहाँ उद्योगों के लिए रिस्क और ट्रस्ट बेस्ड परमिशन सिस्टम लागू होगा।

दूसरी ओर, प्लास्टिक के गंभीर खतरों को लेकर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर द्वारा लाए गए अशासकीय संकल्प पर चर्चा के दौरान पूरे सदन ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया।

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देश में पहली बार: स्व-घोषणा पर शुरू होंगे छोटे उद्योग, 8 विभागों की 43 सेवाएं शामिल

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026 के पारित होने से राज्य के व्यापारिक वातावरण में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। पर्यावरण और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस विधेयक के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि नई व्यवस्था से प्रदेश के 15 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सीधा लाभ मिलेगा।

इस अधिनियम के तहत अब हर वर्ष लाइसेंस या अनुमति के नवीनीकरण (रिन्यूअल) की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।एमएसएमई इकाइयों के लिए पानी की सप्लाई, फर्म का पंजीयन और भवन अनुज्ञा जैसी सेवाएं स्व-घोषणा (सेल्फ सर्टिफिकेशन) या अधिकृत विशेषज्ञों के प्रमाण-पत्र के आधार पर मिलेंगी। यदि तय समय-सीमा में विभाग निर्णय नहीं लेता, तो इसे ‘स्वतः स्वीकृत’ (Auto Approval) मान लिया जाएगा।

अधिनियम को सुचारू रूप से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली परिषद के मार्गदर्शन में राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं। फिलहाल 8 विभागों की 43 सेवाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

ट्रायबल विभाग में उप अभियंताओं के 17 पद खाली, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के नियमितीकरण पर सरकार के पास स्थायी नीति नहींट्रायबल विभाग में उप अभियंताओं के 17 पद खाली, चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के नियमितीकरण पर सरकार के पास स्थायी नीति नहीं

छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 के प्रमुख प्रावधान

श्रेणी / विषय नई व्यवस्था और बदलाव लक्षित लाभ
कम जोखिम वाले उद्योग (Low Risk) विभागीय निरीक्षण बंद, सेल्फ सर्टिफिकेशन और आर्किटेक्ट के प्रमाणन पर मंजूरी। छोटे कारोबारियों को जटिल कागजी प्रक्रियाओं से मुक्ति।
अधिक जोखिम वाले उद्योग (High Risk) आवश्यक तकनीकी परीक्षण और भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी। पर्यावरण और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं।
लाइसेंस अवधि प्रतिवर्ष रिन्यूअल कराने की अनिवार्यता पूरी तरह खत्म। उद्यमियों के समय और लागत में बड़ी बचत।

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प्लास्टिक प्रदूषण पर कड़ा रुख: 140 टन की खपत, सामाजिक आंदोलन बनाने पर जोर

बिजनेस को बढ़ावा देने के साथ ही सरकार पर्यावरण संतुलन को लेकर भी गंभीर नजर आई। विधायक अजय चंद्राकर द्वारा लाए गए अशासकीय संकल्प पर बोलते हुए पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने माना कि छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक वर्तमान में एक बेहद घातक समस्या बन चुका है। मंत्री ने कहा कि प्लास्टिक पर कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए लाए गए इस संकल्प को उनके ठोस आश्वासन के बाद वापस ले लिया गया है, क्योंकि सरकार इस पर रोक लगाने, प्लास्टिक कचरे के बेहतर निपटान और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर कड़े नियम बनाने पर गंभीरता से काम कर रही है।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आंकड़ों के साथ प्लास्टिक से हो रहे नुकसान को सदन के सामने रखा:

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इंसान हर हफ्ते ले रहा 5 ग्राम प्लास्टिक: कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने गंभीर शोधों का हवाला देते हुए कहा कि प्लास्टिक आज जल और जमीन को दूषित कर चुका है और जाने-अनजाने में एक व्यक्ति प्रति सप्ताह 5 ग्राम प्लास्टिक अपने शरीर में ले रहा है। माइक्रो प्लास्टिक इंसानी दिमाग तक पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में रोजाना 140 टन प्लास्टिक का उपयोग होता है, जिसमें से प्रतिदिन 40 टन प्लास्टिक कचरे का सही तरीके से निपटान नहीं हो पा रहा है।

           उमेश पटेल ने सरकार का ध्यान खींचते हुए कहा कि प्लास्टिक की बोतलों में शराब दिया जाना अत्यंत गलत है। उन्होंने सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक को रीसायकल कर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया और इस मुद्दे को सामाजिक आंदोलन बनाने में सरकार से बड़ी भूमिका निभाने की मांग की। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिया है।

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