अगस्त में कब-कब बंद रहेंगे बैंक, स्कूल और सरकारी दफ्तर? जानें किस-किस दिन रहेगा अवकाश

नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय ने करुणामूलक यानी अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए केवल तलाकशुदा या पति द्वारा छोड़ी गई (परित्यक्ता) बेटियों को पात्र मानना और अन्य विवाहित बेटियों को इससे बाहर रखना संविधान के समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने बिहार सरकार की 10 दिसंबर 2014 की नीति की संबंधित शर्त को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, सांसद-विधायकों के आपराधिक केसों का हो जल्द निपटारा

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दोहराया कि वह पहले भी कई मामलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि पुत्र और पुत्री के बीच किसी भी प्रकार का लिंग आधारित भेदभाव संविधान के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील को भी पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि शादी के बाद बेटी अपने ससुराल चली जाती है। कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसा कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि विवाह के बाद बेटी का अपने मायके या माता-पिता से संबंध समाप्त हो जाता है। इसलिए केवल वैवाहिक स्थिति को आधार बनाकर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: आपसी सहमति का कोई कानूनी औचित्य नहीं, दोषी की 7 साल की सजा रखी बरकरार

यह पूरा मामला बिहार की एक महिला की याचिका से जुड़ा हुआ है, जिनके पिता राज्य सरकार में कर्मचारी थे। पिता के निधन के बाद जब महिला ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, तो अधिकारियों ने यह कहते हुए उसका दावा खारिज कर दिया कि वह न तो तलाकशुदा है और न ही परित्यक्ता। इसके अलावा शुरुआत में परिवार के एक सदस्य की आपत्ति का भी हवाला दिया गया था, जिसे बाद में अनापत्ति प्रमाणपत्र देकर सुलझा लिया गया था।

महिला की ओर से अदालत को बताया गया कि यद्यपि उसका कानूनी तलाक अंतिम रूप नहीं ले पाया था, लेकिन वह अपने मायके में ही रह रही थी और परिवार पर ही आश्रित थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाकर किसी पात्र व्यक्ति का दावा ठुकराने को गलत माना।

शिक्षाकर्मियों की पेंशन को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राज्य सरकार की रिट अपील खारिज

मामले की पूरी समीक्षा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के पुराने फैसले और राज्य सरकार द्वारा महिला का आवेदन खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि वह महिला के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर सभी तथ्यों और योग्यता के आधार पर अगले आठ सप्ताह के भीतर नए सिरे से निर्णय लेकर उचित कार्रवाई करे।

मिड-डे मील योजना: छत्तीसगढ़ के सिर्फ 7 जिलों में मिलेट चिक्की बांटने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version