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**रायपुर, छत्तीसगढ़।** छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारियों के लिए एक बेहतर मानव संसाधन नीति बनाने का वादा फिलहाल सरकारी फाइलों में ही दबा नजर आ रहा है।

राज्य में नई सरकार के गठन के बाद मनरेगा कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई थी, जिसे केवल 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। हालांकि, विडंबना यह है कि 20 महीने बीत जाने के बाद भी एचआर पॉलिसी से जुड़ी फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं और कर्मचारियों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। इसी सिलसिले में छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की प्रांतीय टीम ने अपनी मांगों को लेकर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों सहित उपमुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री विजय शर्मा से महत्वपूर्ण मुलाकात की।

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महासंघ के प्रतिनिधियों ने चर्चा के दौरान अपनी प्रमुख मांगों को मजबूती से रखा, जिसमें विशेष रूप से स्पष्ट मानव संसाधन नीति, सामाजिक सुरक्षा, भविष्य निधि और स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा शामिल था। टीम ने कमिश्नर मनरेगा तारण प्रकाश सिन्हा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक से मुलाकात कर पॉलिसी की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी। महासंघ ने शासन के समक्ष यह तर्क दिया कि जब इसी राज्य की अन्य योजनाओं जैसे एनएचएम, आईसीडीएस और एनआरएलएम में एचआर नीति लागू की जा सकती है, तो मनरेगा कर्मचारियों के लिए इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

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कर्मचारी महासंघ ने प्रशासन द्वारा दी जाने वाली परिभाषाओं पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि जो कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिन्होंने विधिवत तकनीकी डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाई है, उन्हें ‘अकुशल’ की श्रेणी में रखना उनकी योग्यता और योगदान का सरासर अपमान है। महासंघ ने यह भी याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ ने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है, उसमें इन कर्मचारियों की महती भूमिका रही है। विशेषकर एक वित्तीय वर्ष में 6 लाख आवास निर्माण का जो ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना है, वह देश के किसी भी अन्य राज्य के लिए अब तक असंभव रहा है।

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प्रशासनिक स्तर पर प्रमुख सचिव ने यह स्पष्ट किया कि मनरेगा एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके कारण राज्य स्तर पर अलग से एचआर पॉलिसी बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। हालांकि, महासंघ ने अन्य योजनाओं के उदाहरण देते हुए इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने संवेदनशीलता दिखाई और अपने ओएसडी को एचआर पॉलिसी के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए। साथ ही उन्होंने रोजगार सहायकों के संविदा से संबंधित मुद्दों के समुचित परीक्षण का आश्वासन भी दिया है। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कबीरधाम जिले सहित प्रदेश भर के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मी उपस्थित रहे, जो अब सरकार के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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