नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अब केवल हरियाली ही नहीं, बल्कि औषधियों की महक भी बिखरेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राजमार्गों के किनारे खाली पड़ी जमीनों का सदुपयोग करने और जैव विविधता को बढ़ाने के लिए ‘एनएचएआई आरोग्य वन’ परियोजना की शुरुआत की है। इस पहल के तहत देश के प्रमुख राज्यों में हजारों की संख्या में औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे।
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11 राज्यों से होगी शुरुआत, लगेंगे 67 हजार से अधिक पौधे
आरोग्य वन परियोजना के पहले चरण में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात सहित 11 राज्यों की पहचान की गई है। लगभग 62.8 हेक्टेयर भूमि पर करीब 67,462 औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। मानसून के दौरान इस अभियान को गति देने के लिए एनएचएआई ने 188 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि भी चिन्हित की है, ताकि पौधों के जीवित रहने की दर को बढ़ाया जा सके।
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36 प्रजातियों के औषधीय वृक्ष बढ़ाएंगे विरासत की शान
इस परियोजना के लिए नीम, आंवला, इमली, जामुन, नींबू, गूलर और मौलसरी जैसी लगभग 36 औषधीय प्रजातियों का चयन किया गया है। इन्हें स्थानीय जलवायु और मिट्टी की उपयुक्तता के आधार पर लगाया जाएगा। इन वनों को विकसित करने के लिए टोल प्लाजा, इंटरचेंज और सड़क किनारे की सुविधाओं (Waysides Amenities) के पास की जमीनों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आम जनता और यात्रियों के बीच जागरूकता बढ़ सके।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक बुनियादी ढांचे का संगम
एनएचएआई का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों और स्वदेशी वनस्पतियों का संरक्षण करना भी है। ये ‘आरोग्य वन’ एक जीवंत भंडार (Resource Centers) के रूप में कार्य करेंगे, जो यात्रियों को भारत की समृद्ध औषधीय विरासत के प्रति जागरूक करेंगे। साथ ही, यह पहल पक्षियों, परागणकों और सूक्ष्मजीवों के लिए एक बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगी।
इस पहल से न केवल नेशनल हाईवे ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित होंगे, बल्कि ये ज्ञान और सेहत के केंद्र भी बनेंगे। आत्मनिर्भर भारत और सतत जीवन शैली की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।


