नई दिल्ली:
भारत में इस्तेमाल किए गए (सेकेंड-हैंड) वाहनों की खरीद-बिक्री में वर्षों से चली आ रही बड़ी खामी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने एक कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। सरकार द्वारा जारी एक नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, यदि कोई खरीदार वाहन खरीदने के 6 महीने के भीतर औपचारिक रूप से रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उस वाहन का मालिकाना हक स्वचालित (Auto-transfer) रूप से वापस उसी डीलर के नाम दर्ज हो जाएगा।
यह नियम भारत के ऑटोमोबाइल मार्केट में आरसी ट्रांसफर में होने वाली भारी ढिलाई, ट्रैफिक चालान और कानूनी देनदारियों से जुड़े विवादों को खत्म करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है।
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नए ड्राफ्ट नियम की मुख्य बातें:
6 महीने की सख्त समय-सीमा:
खरीद के 6 महीने तक यदि आरसी ट्रांसफर नहीं कराई गई, तो आरटीओ (RTO) रिकॉर्ड में वाहन का स्वामित्व खुद-ब-खुद डीलर के नाम पर ट्रांसफर हो जाएगा। इसके साथ ही उससे जुड़ी सभी कानूनी व वित्तीय जिम्मेदारियां भी डीलर के सिर आ जाएंगी।
ट्रांसफर के लिए कड़े पात्रता नियम:
अब बिना वैध इंश्योरेंस (Insurance), प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC Certificate) और वैध आरसी के मालिकाना हक का ट्रांसफर नहीं होगा। इसके अलावा, जिन वाहनों पर कोई ट्रैफिक चालान पेंडिंग है या टैक्स बकाया है, वे बकाए चुकता होने तक ट्रांसफर के पात्र नहीं होंगे।
V2V तकनीक का प्रस्ताव:
इसी ड्राफ्ट के तहत सरकार ने 1 अक्टूबर 2028 से सभी नई L, M और N श्रेणी के वाहनों में अनिवार्य व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक लागू करने का भी प्रस्ताव रखा है।
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खरीदारों और डीलरों पर क्या पड़ेगा असर?
डीलरों पर फॉलो-अप का दबाव:
यह नियम ऑटो डीलरों को इस बात के लिए प्रेरित करेगा कि वे खरीदार से जल्द से जल्द कागजी कार्रवाई पूरी कराएं, ताकि 6 महीने बाद कानूनी या वित्तीय देनदारी उनके सिर न आए।
अनौपचारिक आदतों पर लगाम:
अक्सर लोग पुराने मालिक की आरसी पर ही सालों तक गाड़ी चलाते रहते हैं। नया नियम इस लापरवाही को पूरी तरह खत्म कर देगा।
कानूनी विवादों से मुक्ति:
गाड़ी से होने वाले हादसों, ट्रैफिक उल्लंघनों और टैक्स बकाए से जुड़े मामलों में असली जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान तुरंत हो सकेगी, जिससे पुराने मालिकों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
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वर्तमान स्थिति और आगे का कदम
यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (Draft Notification) के रूप में पेश किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस पर आम जनता, ऑटो इंडस्ट्री और डीलरों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सभी हितधारकों के फीडबैक की समीक्षा के बाद इस नियम का अंतिम स्वरूप तय कर इसे देशभर में लागू किया जाएगा।

