रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की सेवा सुरक्षा समेत लंबित मांगों को लेकर आंदोलन अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। शिक्षक संगठनों ने सरकार के सामने 5 सितंबर तक सकारात्मक निर्णय का अवसर रखा है। इसके बाद 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन और ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ शुरू करने की घोषणा की गई है।
छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने भी इस मुहिम में शिक्षक संवर्ग के साथ आने कि बात कहीं है।
आंदोलन का कैलेंडर
17 अगस्त — बेमेतरा डीईओ कार्यालय घेराव
22 अगस्त — सभी ब्लॉकों में धरना, रैली एवं ज्ञापन
29 अगस्त — 33 जिलों में धरना एवं रैली
30 अगस्त–4 सितंबर — सोशल मीडिया अभियान
5 सितंबर — शिक्षक दिवस पर सरकार के निर्णय की प्रतीक्षा
9 सितंबर — ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ एवं निर्णायक आंदोलन
9 सितंबर से — मांग पूरी होने तक अनिश्चितकालीन आंदोलन
रविंद्र राठौर बोले—सेवा सुरक्षा केवल कागजी प्रक्रिया नहीं, भविष्य का सवाल
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि सेवा सुरक्षा को केवल किसी आदेश या प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य, परिवार और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि वेतन विसंगति और पूर्व सेवा की गणना जैसे मुद्दों का समाधान भी इसी व्यापक समस्या का हिस्सा है। सरकार को शिक्षकों की भावनाओं को समझते हुए अब निर्णायक पहल करनी चाहिए।
विकास राजपूत बोले—संघर्ष की हर सीढ़ी सोच-समझकर तय की गई
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि आंदोलन को सीधे उग्र रूप देने के बजाय संगठनों ने पहले चरणबद्ध और लोकतांत्रिक तरीका चुना है।
उन्होंने कहा कि पहले बेमेतरा, फिर ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर के कार्यक्रम रखे गए हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं होता है तो आंदोलन का अगला चरण स्वाभाविक रूप से बड़ा होगा। उन्होंने शिक्षकों से शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
प्रदीप पांडेय बोले—अब समय आ गया है धरातल में उतर कर अपनी नौकरी बचाने का
सर्व शिक्षक संघ के प्रदीप पांडेय ने कहा कि “हमारी प्राथमिकता संगठन नहीं, शिक्षक हित है। सेवा भर्ती नियम कों पास कर शिक्षक बने शिक्षक कों आज पुनः शिक्षक पात्रता परीक्षा लिखवाना बिल्कुल गलत है वो भी उन शिक्षकों से जिनकी नियुक्ति के समय टेट लागु नहीं था।”
पांडेय ने कहा कि सभी संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाकर आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी है। सरकार यदि समय रहते निर्णय लेती है तो टकराव की स्थिति से बचा जा सकता है।
9 सितंबर से आंदोलन का अगला चरण
5 सितंबर तक सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर 9 सितंबर से ‘सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा’ के साथ अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की गई है।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार बिलासपुर और सरगुजा संभाग के शिक्षक कुनकुरी में मुख्यमंत्री निवास की ओर तथा बस्तर, दुर्ग और रायपुर संभाग के शिक्षक दुर्ग में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के आवास की ओर कूच करेंगे।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा और मांगों पर निर्णय होने तक इसे समाप्त नहीं किया जाएगा।


